हुबली: उत्तर कर्नाटक में गन्ने से लदे ट्रैक्टर और दूसरे वाहन सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों के लिए मौत का जाल बन रहे हैं। पिछले कुछ सालों में कारों, बाइकों और दूसरे वाहनों में यात्रा कर रहे सैकड़ों लोगों की गन्ने से लदे वाहनों की वजह से या तो जान चली गई या वे घायल हो गए। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि ट्रैक्टर मालिक अपनी क्षमता से ज़्यादा गन्ना लादते हैं और दूसरे ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हैं, जैसे कि पीछे की तरफ साइन और इंडिकेटर न लगाना। कई बार वे रात में सड़क किनारे पार्क कर देते हैं, और दूसरे वाहन उनसे टकरा जाते हैं। यात्री ऐसे वाहनों को रेगुलेट करने की मांग कर रहे हैं ताकि वे सड़क नियमों का पालन करें।
उत्तर कर्नाटक के एक टॉप पुलिस अधिकारी ने TOI को बताया कि, यह एक खुला रहस्य है कि 4 टन की क्षमता वाले ट्रैक्टरों में 10-12 टन गन्ना लादा जाता है। जबकि 6-पहिया ट्रकों में अधिकतम क्षमता 12 टन होती है, कुछ लोग 16-20 टन लादते हैं। पुलिस आमतौर पर किसानों के प्रति इंसानियत दिखाते हुए कार्रवाई नहीं करती है। हालांकि, इसका गलत फायदा उठाया जाता हैं। अगर हम जुर्माना लगाते हैं, तो हम पर कार्रवाई न करने का राजनीतिक दबाव भी आता है, क्योंकि ज्यादातर चीनी मिलें राजनेताओं द्वारा चलाई जाती हैं। इन सबके बावजूद, हम अक्सर ऐसे ट्रैक्टर मालिकों और ड्राइवरों के लिए जागरूकता अभियान चलाते हैं ताकि वे इंडिकेटर, रिफ्लेक्टर और रेडियम कटिंग लगवाएं।
विजयपुरा में एक किसान नेता अरविंद कुलकर्णी ने कहा कि गन्ना लादना और सड़क नियमों का पालन करना ट्रैक्टर मालिकों और लोडिंग ठेकेदारों की संयुक्त जिम्मेदारी है। कई मामलों में, होने वाले हादसों के लिए सिर्फ ट्रैक्टर मालिकों को जिम्मेदार ठहराया जाता है। पुलिस हर ट्रैक्टर या ट्रक की ओवरलोडिंग और दूसरे नियमों के उल्लंघन पर नज़र नहीं रख सकती। हालांकि, अगर वे किसानों के साथ मिलकर जागरूकता फैलाने के लिए लगातार काम करें, तो इस खतरे को कम किया जा सकता है। किसानों को समझना चाहिए कि यह सिर्फ़ नियमों का पालन करना नहीं है, बल्कि मासूमों की जिंदगी का सवाल है।

















