नई दिल्ली : केंद्र सरकार की PSU, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL), पंजाब के बठिंडा जिले के नसीबपुर गांव में धान के पुआल पर आधारित 2G बायो-एथेनॉल प्लांट लगा रही है। यह प्रोजेक्ट मार्च 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है और पूरी क्षमता से चलने पर यह सालाना लगभग 2 लाख टन धान के पुआल का इस्तेमाल करेगा।यह जानकारी पंजाब एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (PEDA) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी, श्रीमती नीलिमा ने PPAC (पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल) जर्नल, जनवरी 2026 में दी।
यह प्लांट पंजाब में, खासकर बठिंडा जिले में, इस साल और आने वाले सालों में भी धान के पुआल जलाने की घटनाओं को काफी कम करेगा। यह 2G बायो-रिफाइनरी केंद्र सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल बनाने के लिए धान के पुआल का इस्तेमाल करने के लिए डिज़ाइन की गई है। इस 2G एथेनॉल प्लांट की डिज़ाइन की गई उत्पादन क्षमता 100 किलो लीटर (KL) एथेनॉल/दिन है और इसके लिए प्रतिदिन 570 मीट्रिक टन धान के पुआल का इस्तेमाल किया जाएगा (सालाना 2,00,000 मीट्रिक टन), जब प्लांट अपनी पूरी क्षमता से चलेगा।
इस सीजन में लगभग 1 लाख मीट्रिक टन बायोमास खरीदा जाएगा, जिसका इस्तेमाल आने वाले 2G एथेनॉल प्लांट के लिए फीडस्टॉक के रूप में किया जाएगा, जिसके मार्च 2026 तक चालू होने की उम्मीद है। प्लांट लगाने की प्रगति पर NCR और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) भी नजर रख रहा है। PEDA पंजाब सरकार की ओर से नई और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (NRSE) नीति को लागू करने के लिए राज्य नोडल एजेंसी है। यह NRSE प्रोजेक्ट डेवलपर्स से प्रस्ताव आमंत्रित करने की प्रक्रिया तय करने, यानी बोली दस्तावेज़ तैयार करने, बोली प्रक्रिया का प्रबंधन करने, प्रोजेक्ट प्रस्तावों का मूल्यांकन करने और सफल बोली लगाने वाले को इसे देने, प्रोजेक्ट अनुमोदन और DPR की जांच, प्रोजेक्ट कार्यान्वयन और निगरानी के लिए ज़िम्मेदार है।

















