अमरोहा :उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में गन्ने की फसल में रेड रोट (लाल सड़न) रोग के चलते उत्पादन में भारी गिरावट देखी जा रही है। उत्पादकता भी बुरी तरह प्रभावित है। इसका सीधा असर चीनी मिलों पर पड़ रहा है। नवंबर से अप्रैल तक चलने वाला पेराई सत्र इस बार मार्च के मध्य में ही दम तोड़ सकता है। आने वाले दिनों में शुगर मिलों के सामने गन्ने का संकट मंडरा सकता है। कई मिलों को मार्च में ही बंद कर देना पड़ेगा। चीनी उत्पादन में भी कमी आने का अनुमान है। अमरोहा जिले में एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल पर गन्ने की खेती की जा रही है।
हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर के अनुसार, जिले में तीन शुगर मिलें संचालित हैं। इसके अलावा सात मिलें अन्य जनपदों में संचालित हैं। अन्य जनपदों में संचालित शुगर मिलों के सेंटर जिले में संचालित हैं। टाप शूट बोरर और रेड राट (लाल सड़न) बीमारी के चलते गन्ना उत्पादन में इस बार भारी गिरावट आई है। शुगर मिलें अभी तक करीब 350 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर चुकीं हैं। लेकिन जल्द ही गन्ने की कमी का खतरा दिख रहा है। हालांकि ऐसी स्थिति किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है, क्योंकि कम आपूर्ति के चलते पेराई सत्र के आखिर में गन्ने की कीमत अच्छी मिल सकती है। अधिक से अधिक गन्ना लेने के लिए मिलों के बीच प्राइस वार के हालात बन सकते हैं। बीमारी के चलते गन्ने की फसल का विकास पर्याप्त नहीं हो पाया है। पिछले पेराई सत्र में शुगर मिलों द्वारा 448.15 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद की गई थी। 28.92 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ था। लेकिन इस बार गन्ना उत्पादन में 30 फीसदी की गिरावट आने से चीनी उत्पादन में भी गिरावट आएगी। अमरोहा डीसीओ मनोज कुमार ने कहा कि, गन्ने की प्रजाति 238 में रेड रोट के चलते उत्पादन में गिरावट आई है। उत्पादकता दर गिरी है।

















