पटना : बिहार के किसान गन्ना उगाने के साथ साथ खुद गुड उत्पादन कर आत्मनिर्भर हो रहे है। जागरण में प्रकाशित खबर के अनुसार, आमतौर पर गन्ना उपज को बाजार तक पहुंचने में किसानों का फायदा बिचौलिए खा जाते हैं। भोजपुर जिले के संदेश प्रखंड अंतर्गत बागा पंचायत के नूरपुर गांव के गन्ना किसानों का व्यापार मॉड्यूल इस मामले में अनूठा है। यहां किसानों और ग्राहकों के बीच कोई बिचौलिया नहीं है। जिले में दूर-दूर तक कहीं चीनी मिल नहीं है, लेकिन गांव गन्ना की खेती के लिए जाना जाता है।
खबर में कहा गया है कि, गांव के आधा दर्जन किसान मिलकर गन्ना की खेती करते हैं और वहीं उसका गुड़ बना बेचते हैं। शुद्धता और गुणवत्ता में बेहतर होने के कारण जिलेभर से लोग वहां गुड़ खरीदने पहुंचते हैं। सामने बनते ताजा गुड़ को सौ रुपये किलो खरीदने के लिए भी मारा-मारी रहती है। खास तौर पर यहां मिलने वाले गुड़ के पाउडर को लोग चीनी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने के लिए ले जाते हैं।
प्रगतिशील किसान धीरज सिंह लगभग दो वर्षों से वे नासरीगंज–सकड्डी मुख्य सड़क किनारे अपने गांव स्थित अपनी तीन एकड़ भूमि में गन्ने की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि, गन्ने / ईख की उन्नत खेती और गुड़ निर्माण की बारीकियों को समझने के लिए उन्होंने समस्तीपुर राजेन्द्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय में एक सप्ताह का प्रशिक्षण लिया। किसान अजीत कुमार के अनुसार, ईख की खेती में एक एकड़ में लगभग एक लाख 50 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। जबकि, इससे लगभग प्रति हेक्टेयर 12 लाख तक की आमदनी हो रही है।

















