नासिक (महाराष्ट्र): नीमगांव-देवपुर इलाके में जब गन्ना काटने का काम चल रहा था, तब लगातार तीन दिन तक तेंदुए के शावक नजर आते रहे। एक तरफ मादा तेंदुआ शावकों की सुरक्षा के लिए जूझ रही थी, तो दूसरी तरफ दहशत फैलने से बस्ती के किसानों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता हो रही थी। महिलाओं ने वन विभाग की गाड़ियों को रोककर अपना गुस्सा निकाला। आखिर में मादा साथ पिंजरे में फंसने के बाद तेंदुए और इंसान के बीच का टकराव खत्म हुआ।
नीमगांव में शुक्रवार (6) दोपहर करीब 2 बजे यशवंत कांडेकर के खेत में गन्ना काटते समय तीन शावक नजर आये।इससे इलाके में डर का माहौल बन गया। उसी रात तेंदुआ शावकों को पास के दूसरे गन्ने के खेत में ले गई। शनिवार को जब पास में गन्ने की कटाई फिर से शुरू हुई, तो वही शावक गन्ने में मिले। वहां से मादा फिर शावकों को सुरक्षा के लिए दूसरे गन्ने के खेत में ले गई। रविवार को इस गन्ने की कटाई शुरू होने के बाद, शावक तीसरी बार फिर मिले।
लगातार तीन दिनों तक जब इलाके में तेंदुआ और उसके शावक दिखे, तो महिलाओं समेत किसानों ने बस्ती में वन विभाग की गाड़ियों को रोक दिया।उन्होंने तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की। आखिरकार, रविवार आधी रात को मादा पिंजरे में फंस गई। वन विभाग ने उसके शावकों को ढूंढकर तेंदुए पास रखा।अब उन्हें मोहदरी फॉरेस्ट पार्क में शिफ्ट कर दिया गया है।
लगातार तीन दिनों तक, जिस जगह शावक मिले थे, उससे सिर्फ 150 मीटर की दूरी पर एक मजदूर के डेढ़ साल के बेटे गोलू शिवराज शिंगाड़े को तेंदुए ने घसीटकर ले जाकर मार डाला। सिर्फ़ 500 मीटर दूर, 7 सितंबर को 11 साल के सारंग गणेश थोरात को मक्के के खेत में घसीट कर तेंदुए द्वारा मार डाला गया। इन दो घटनाओं से इलाके में दहशत बनी हुई है।लगातार तीन शावकों को देखे जाने के बाद किसान अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे।














