मध्य प्रदेश : अब AI-बेस्ड उड़ने वाला रोबोट गन्ना किसानों को पेस्ट इन्फेक्शन से बचाने में करेगा मदद

इंदौर: फसल की बीमारियों से जूझ रहे गन्ना किसानों को अब तितली के आकार का एक एडवांस्ड उड़ने वाला रोबोट मिलेगा जो फसल के बीच से उड़कर पेस्ट इन्फेक्शन की पहचान कर सकता है। इस उड़ने वाले रोबोट को श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS), इंदौर और दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) के रिसर्चर्स ने मिलकर डिजाइन किया है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित खबर के अनुसार, SGSITS के IT डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर उपेंद्र सिंह और DTU के डॉ. संजय पाटीदार ने इंदौर में इस प्रोजेक्ट को लीड किया। डिवाइस ने पत्तियों की पास से तस्वीरें लीं और AI का इस्तेमाल करके रेड रॉट, स्मट, विल्ट और रेटून स्टंटिंग जैसी बीमारियों की शुरुआती स्टेज में ही पहचान की। GPS टैगिंग हर इन्फेक्टेड पौधे की सही जगह बताती थी ताकि किसान सीधे इन्फेक्टेड जगहों पर जा सकें, सिर्फ़ ज़रूरी इलाज कर सकें, और हेल्दी फसल वाले इलाकों में फैलने से रोक सकें।

सिंह ने TOI को बताया की, गन्ने के खेत घने और ऊँचे होते हैं, और कई इन्फेक्शन उन जगहों पर शुरू होते हैं जहाँ रेगुलर इंस्पेक्शन करना मुश्किल होता है। किसान हर पौधे को हाथ से नहीं देख सकते, और आम एरियल व्यू में फसल के अंदर की डिटेल्स छूट जाती हैं। यह सिस्टम बीमारी का जल्दी पता लगाने और किसानों को सही जगह तक पहुँचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।”

टीम ने पहले रोबोट को ग्राउंड व्हीकल मॉडल के तौर पर डेवलप किया था, लेकिन बाद में कॉस्ट, बैलेंस और फील्ड कवरेज को ऑप्टिमाइज़ करने के लिए तितली और पक्षी जैसे स्ट्रक्चर वाले हल्के उड़ने वाले प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो गए।रिसर्चर्स ने टेक्नोलॉजी के लिए पेटेंट फाइल किया था और अप्रूवल का इंतज़ार कर रहे थे। सभी ऑब्ज़र्वेशन एक वेब और मोबाइल प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं जो एक डिजिटल फील्ड मैप बनाता है।

किसान बीमारी के हीट मैप, ट्रेंड और अलर्ट देख सकते थे, जिससे समय पर और टारगेटेड इलाज हो सके। इस तरीके ने बीमारी की जल्दी पहचान, स्पेशल मैपिंग और डेटा-ड्रिवन इंटरवेंशन के ज़रिए प्रिसिजन एग्रीकल्चर को सपोर्ट किया, जिससे फसल मैनेजमेंट और यील्ड प्रेडिक्शन को बेहतर बनाने में मदद मिली, साथ ही गैर-ज़रूरी पेस्टिसाइड का इस्तेमाल कम हुआ। सिंह ने कहा कि, इस टूल का इस्तेमाल खेतों के बाहर भी किया जा सकता है।

सिंह ने कहा, MSME एग्रीटेक फर्म ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल फसल की मॉनिटरिंग और बीमारी का एनालिसिस सर्विस के तौर पर कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि, यह डेटा शुगर मिलों, एग्रो-इंडस्ट्री और रिसर्च बॉडीज़ को क्वालिटी असेसमेंट, यील्ड फोरकास्टिंग और सप्लाई चेन प्लानिंग में मदद कर सकता है, और खेत-लेवल की जानकारी को इंडस्ट्री की ज़रूरतों से जोड़ सकता है। इस प्रोजेक्ट को मिनिस्ट्री ऑफ़ माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज, भारत सरकार के तहत ASPIRE स्कीम के ज़रिए इनोवेशन, रूरल इंडस्ट्री और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने के लिए सपोर्ट किया गया था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here