महाराष्ट्र में 2025-26 पेराई सीजन में 1180 लाख टन गन्ने की पेराई और 1080 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन का अनुमान

कोल्हापुर: राज्य में पेराई सीजन अपने आखिरी चरण में पहुंच गया है और शुगर कमिश्नरेट में हुई एक मीटिंग में अनुमान लगाया गया है कि, इस साल 1180 लाख टन गन्ने की पेराई और 1080 लाख क्विंटल (108 लाख टन) चीनी का उत्पादन होने की संभावना है।’चीनीमंडी’ से बात करते हुए, राज्य के शुगर कमिश्नर डॉ. संजय कोलते ने कहा कि, राज्य में चीनी उत्पादन का रिव्यू करने के लिए शुगर कमिश्नरेट ने मंगलवार को मिटकॉन, एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट, विस्मा, शुगर एसोसिएशन के रिप्रेजेंटेटिव की एक मीटिंग बुलाई थी। इस मीटिंग में अब तक के पेराई सीजन का रिव्यू किया गया। साथ ही, राज्य में बचे हुए गन्ने और उसकी संभावित रिकवरी पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें मौजूद सभी एक्सपर्ट्स के अनुमान, ग्राउंड रिपोर्ट्स को ध्यान में रखकर गन्ने की पेराई और चीनी प्रोडक्शन का अनुमान लगाया गया है।

15 मार्च तक खत्म हो जाएगा पेराई का सीजन…

10 फरवरी तक, राज्य में 102 कोऑपरेटिव और 105 प्राइवेट समेत कुल 207 चीनी फैक्ट्रियां शुरू थीं। इन चीनी मिलों ने 918 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 856.07 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। राज्य की औसत चीनी रिकवरी 9.33 प्रतिशत है। शुगर कमिश्नर के बताए गए अनुमान के मुताबिक, राज्य में और 260 लाख टन गन्ने की पेराई होने और 220 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन होने की उम्मीद है। इस बीच, मीटिंग में एक-दो फैक्ट्रियों को छोड़कर पश्चिमी महाराष्ट्र की चीनी फैक्ट्रियों का पेराई सीजन फरवरी के आखिर तक खत्म होने की संभावना जताई गई। अनुमान लगाया गया है कि, मराठवाड़ा की फैक्ट्रियां 15 मार्च तक चल सकती है।

पिछले सीजन से 27 लाख टन ज्यादा चीनी उत्पादन मुमकिन…

राज्य ने 2023-24 के पेराई सीजन में 110 लाख टन चीनी का प्रोडक्शन किया था। जबकि 2024-25 में चीनी उत्पादन तकरीबन 29 लाख टन घटकर सिर्फ़ 81 लाख टन हुआ। हालांकि, पिछले साल राज्य में अच्छी बारिश हुई थी। गन्ने की ग्रोथ भी अच्छी हुई थी। इसलिए, उम्मीद थी कि पिछले दो सीज़न के मुकाबले चीनी का उत्पादन बढ़ेगा। अब सीज़न अपने आखिरी चरण पर पहुँच गया है। अगले कुछ दिनों में चीनी मिलें धीरे-धीरे बंद होने लगेंगी। इसके मद्देनजर 2023-24 पेराई सीजन का 110 लाख टन का रिकॉर्ड बरकरार रहने की उम्मीद है, जबकि 2024-25 सीजन से 27 लाख टन ज्यादा चीनी उत्पादन मुमकिन है।

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