लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) : लखीमपुर खीरी में बजाज हिन्दुस्थान शुगर लिमिटेड चीनी मिल गोला ने बसंतकालीन गन्ना बुवाई के लिए वृहद गोष्ठी का आयोजन किया गया था। इस गोष्ठी में किसानों को नई गन्ना प्रजातियों की बुवाई और उससे अधिक पैदावार प्राप्त करने के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई। गोष्ठी में डॉ. पी.के. कपिल ने किसानों को रेड रॉट रोग से गंभीर रूप से ग्रसित गन्ना प्रजाति को-0238 की बुवाई में सावधानी बरतने की सलाह दी।भास्कर में प्रकाशित खबर के अनुसार, उन्होंने उन्नतशील गन्ना प्रजातियों जैसे को-0118, 15023 और कोलख-14201 की बुवाई करने के लिए प्रेरित किया। निचले क्षेत्रों के लिए को-98014 और कोलख-94184 की बुवाई की भी सिफारिश की गई। साथ ही, हरियाणा 119 (HR), कोशा-91269 और पीबी-95 जैसी अनामित व अस्वीकृत प्रजातियों की बुवाई न करने की सलाह दी गई।
वरिष्ठ महाप्रबंधक (गन्ना) पी.एस. चतुर्वेदी ने किसानों गन्ने के ऊपरी दो तिहाई हिस्से को बीज के रूप में उपयोग करने को कहा। उन्होंने 04 फीट की दूरी पर ट्रेंच विधि से गन्ना बोने के लाभों पर भी प्रकाश डाला। इसके अतिरिक्त, गहरी जुताई से मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ने, मृदा में वायु संचार बेहतर होने और पैदावार में वृद्धि होने के फायदे बताए गए। उन्होंने कहा, भूमि उपचार के लिए ट्राइकोडर्मा चीनी मिल द्वारा अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान शाहजहांपुर के सहायक निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पी.के. कपिल और चीनी मिल के वरिष्ठ महाप्रबंधक (गन्ना) पी.एस. चतुर्वेदी आदि उपस्थित रहे।

















