महाराष्ट्र: राज्य की 157 फैक्ट्रियों पर 4,601 करोड़ रुपये का FRP बकाया, 49 फैक्ट्रियों ने शत प्रतिशत किया भुगतान

कोल्हापुर: राज्य में गन्ने की पेराई का सीजन अब अपने आखिरी दौर में पहुंच गया है और कुछ फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं। शुगर कमिश्नरेट ने पिछले हफ्ते हुई मीटिंग में अनुमान लगाया है कि, पेराई का सीजन 15 मार्च के आखिर तक खत्म हो जाएगा। हालांकि पेराई का सीजन खत्म हो रहा है, लेकिन शुगर कमिश्नरेट की 18 फरवरी को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य की 157 शुगर फैक्ट्रियों पर 15 फरवरी के आखिर तक गन्ना किसानों का 4,601 करोड़ रुपये का FRP बकाया है।

शुगर कमिश्नरेट की दी गई जानकारी के मुताबिक, पेराई कर रही 206 शुगर फैक्ट्रियों में से 157 फैक्ट्रियों ने 15 फरवरी के आखिर तक पूरा FRP भुगतान नहीं किया है। सिर्फ 49 फैक्ट्रियों ने 100 परसेंट FRP भुगतान किया है। राज्य में 31 जनवरी तक 870.11 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई हो चुकी है। इस गन्ने के लिए ट्रांसपोर्टेशन और हैंडलिंग (कटिंग और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट सहित) मिलाकर कुल FRP 33,697 करोड़ रुपये होती है। इसमें से चीनी मिलों द्वारा 29,096 करोड़ रुपये (ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट सहित) FRP के तौर पर दिए जा चुके हैं। राज्य की केवल 49 फैक्ट्रियों ने शत प्रतिशत एफआरपि भुगतान किया है। 58 फैक्ट्रियों ने 80 से 99.99 प्रतिशत FRP दिया है। 58 फैक्ट्रियों ने 60 से 79.99 परसेंट FRP भुगतान किया है, और 41 फैक्ट्रियां फिसड्डी साबित हुई है, उन्होंने 60 परसेंट से कम FRP का भुगतान किया है।

बाजार में चीनी की कम डिमांड के कारण कुछ अपवादों को छोड़कर कीमतें स्थिर रही हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी के एक्सपोर्ट की इजाजत दी है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे चीनी इंडस्ट्री को ज्यादा फायदा नहीं होगा। क्योंकि इंटरनेशनल मार्केट में चीनी की कीमतें स्थानीय मार्केट से कम हैं। इसलिए, फैक्ट्रियों का मानना है कि एक्सपोर्ट फैक्ट्रियों के लिए अफ़ोर्डेबल नहीं है। चीनी फैक्ट्रियाँ मांग कर रही हैं कि चीनी का MSP बढ़ाकर 41 रुपये प्रति kg किया जाए, एथेनॉल की कीमतें बढ़ाई जाएं, ताकि मिलें समय पर किसानों का भुगतान कर सके।

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