कुशीनगर : गन्ने में कीट के हमलें ने किसानों की मुसीबत बढाई है। ढाढा में गन्ना फसल में अंकुरबेधक कीट (पिहीका) का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है।यह कीट औसतन 15 से 20 प्रतिशत तक उपज घटाता है और चीनी परता को भी प्रभावित करता है। गन्ना किसान अपनी फसल बचाने के लिए कीट की रोकथाम की कोशिशों में जुटे है। ‘भास्कर’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, गन्ना पूर्व सहायक निदेशक डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता ने कहा कि इस कीट की सूंडी भूरे-मटमैले रंग की होती है, जिसकी पीठ पर बैंगनी धारियां दिखाई देती हैं। यह सूंडी गन्ने के मुलायम तने में बारीक छेद करके अंदर प्रवेश करती है। अंदर घुसकर यह गोंफ-सीका को खाती हुई नीचे की ओर बढ़ती है, जिससे पौधे को नुकसान होता है। कीट के हमले के परिणामस्वरूप गोंफ-सीका सूख जाता है और खींचने पर आसानी से बाहर निकल आता है, जबकि किनारे की दोनों पत्तियां हरी बनी रहती हैं।
उन्होंने आगे कहा, तापमान के अनुसार, यह कीट 30 से 40 प्रतिशत तक पौधों को नष्ट कर सकता है। इस कीट की छह पीढ़ियां पाई जाती हैं, जिससे इसका प्रकोप लगातार बना रहता है। नियंत्रण के उपायों के तहत, डॉ. गुप्ता ने सलाह दी है कि गन्ना बोते समय नाली में मसाक्रा 4जी दानेदार (क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल-4%) का 8 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें। इससे पिहीका का प्रकोप शुरुआत में ही थम जाएगा। इसके अतिरिक्त, प्रभावित पौधों को काटकर खेत से बाहर निकालें और गर्मी में पर्याप्त सिंचाई सुनिश्चित करें। मई में किया गया यह प्रयोग मथमुड़िया कीट पर भी प्रभावी होता है। उन्होंने गेहूं, मिर्च, प्याज और भिंडी जैसी अन्य फसलों में पत्ती काटने-चबाने वाले और रस चूसने वाले कीटों के लिए भी उपाय बताए। इन कीटों के नियंत्रण के लिए रेन-30 नामक दवा का 1 मिलीलीटर प्रति 2 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। यह दवा दीमक पर भी नियंत्रण करने में सहायक है।


















