बीड : दैनिक ‘लोकमत’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, बीड ज़िले में गन्ना कटाई करने वाले मज़दूरों की सेहत को लेकर एक गंभीर सच्चाई सामने आई है। हाईकोर्ट के साफ़ आदेश के बावजूद कि पाँच महीने से ज़्यादा गर्भवती महिलाओं को गन्ने की कटाई के काम में न लगाया जाए, खबर में दावा किया गया है की, ज़िले में ऐसी 10 गर्भवती महिलाएँ गन्ना कटाई का काम कर रही हैं। कोर्ट ने 2023 में एक सुओ मोटो पिटीशन दायर करके गन्ना कटाई करने वाले मज़दूरों के मामलों की सुनवाई शुरू की थी। मार्च 2025 में दिए गए निर्देशों के मुताबिक, पाँच महीने से ज़्यादा गर्भवती महिलाओं को गन्ने की कटाई के काम में लगाना गैर-कानूनी घोषित किया गया था।
खबर में आगे कहा कहा गया है की, आरोग्य विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, नवंबर 2025 से जनवरी 2026 तक तीन महीनों में 54 गर्भवती गन्ना मज़दूरों का रजिस्ट्रेशन हुआ। इनमें से 10 औरतें रजिस्ट्रेशन के समय पांच महीने से ज़्यादा प्रेग्नेंट थीं। कोर्ट के ऑर्डर के मुताबिक, ये औरतें असल में गन्ने के खेत में काम करती पाई गईं, जबकि उन्हें रेस्ट मिलना चाहिए था। अप्रैल से जनवरी के बीच ज़िले में 40,471 प्रेग्नेंट औरतों का रजिस्ट्रेशन हुआ। आरोग्य विभाग का कहना है कि, गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया जाता है और आशा वर्कर और डॉक्टर महिलाओं की काउंसलिंग करते हैं। उन्हें काम से बचने की सलाह दी जाती है।


















