महाराष्ट्र: कोल्हापुर डिवीज़न की शुगर फैक्ट्रियां राज्य में शत प्रतिशत FRP देने में सबसे आगे

कोल्हापुर: भले ही राज्य में गन्ने की पेराई का सीज़न खत्म होने वाला है, लेकिन शुगर कमिश्नरेट की 18 फरवरी को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, 15 फरवरी के आखिर तक राज्य की 157 शुगर फैक्ट्रियों ने गन्ना किसानों को 4,601 करोड़ रुपये FRP का भुगतान नही किया है। 206 शुगर फैक्ट्रियों में से सिर्फ़ 49 फैक्ट्रियों ने शत प्रतिशत FRP का भुगतान किया है। कोल्हापुर डिवीज़न 13 फैक्ट्रियां शत प्रतिशत भुगतान कर राज्य में सबसे आगे है।

कोल्हापुर डिवीज़न के बाद, शत प्रतिशत FRP भुगतान मामले में सोलापुर डिवीज़न 12 फैक्ट्रियों के साथ दूसरे नंबर पर है, जबकि पुणे और अहिल्यानगर डिवीज़न 9-9 फैक्ट्रियों के साथ तीसरे नंबर पर हैं। नांदेड़ डिवीज़न में 4 फैक्ट्रियों और छत्रपति संभाजीनगर डिवीज़न में 2 फैक्ट्रियों ने 100 परसेंट FRP दिया है। अमरावती और नागपुर डिवीजन की कोई भी फैक्ट्री अभी तक 100 परसेंट FRP नहीं दे पाई है। पेराई सीजन अपने आखिरी चरण में है, और शुगर कमिश्नरेट ने FRP भुगतान में फिसड्डी रही कुछ फैक्ट्रियों को नोटिस जारी किया था।साथ ही जो फैक्ट्रियां FRP देने में आनाकानी कर रही हैं, उन पर भविष्य में कार्रवाई होने की संभावना है।

राज्य में 31 जनवरी तक 870.11 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई हो चुकी है। इस गन्ने के लिए कटाई और ढुलाई मिलाकर कुल 33,697 करोड़ रुपये FRP होती है। इसमें से चीनी मिलों ने कुल 29,382 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।इसमें 49 फैक्ट्रियों ने 100 परसेंट भुगतान किया है। 58 फैक्ट्रियों ने 80 से 99.99 परसेंट FRP का पेमेंट किया। 58 फैक्ट्रियों ने किसानों के अकाउंट में 60 से 79.99 परसेंट FRP ट्रांसफर किया है।जबकि 41 फैक्ट्रियों ने 60 परसेंट से कम FRP भुगतान किया है। अब भी फैक्ट्रियों पर 4,601 करोड़ रुपये का FRP बकाया है।

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