पुणे (महाराष्ट्र): राज्य में पेराई सीजन अपने आखिरी दौर में पहुंच गया है और शुगर कमिश्नरेट ने किसानों को उनके गन्ने के बिल समय पर दिलाने के लिए शुगर फैक्ट्रियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। शुगर कमिश्नर डॉ. संजय कोलते ने पिछले हफ्ते हुई सुनवाई के दौरान मिलों को चेतावनी दी कि, शुगर फैक्ट्रियों द्वारा FRP भुगतान में अगर देरी होती है तो उन्हें किसानों को 15 प्रतिशत ब्याज देना होगा। हालांकि, कुछ फैक्ट्रियों ने कहा कि, एग्रीमेंट के मुताबिक किसानों को FRP की रकम दी जा रही है।
राज्य की जिन मिलों ने किसानों को FRP का 60 परसेंट से कम पेमेंट किया है, उन 45 शुगर फैक्ट्रियों की सुनवाई 17 और 18 फरवरी को शुगर कमिश्नरेट में हुई। डॉ. कोलते ने कहा कि, जैसे ही कमिश्नरेट ने फैक्ट्रियों को बकाया FRP मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया, कुछ फैक्ट्रियों ने रकम चुका दी है। उन्होंने कहा कि, किसानों को उनके गन्ने के बिल समय पर मिलें, इसके लिए हमारी कोशिशें जारी हैं।
राज्य की 49 मिलों द्वारा शत प्रतिशत एफआरपी भुगतान…
शुगर कमिश्नरेट की तरफ़ से 18 फरवरी को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य की 157 शुगर मिलों ने 15 फरवरी के आखिर तक गन्ना किसानों को 4,315 करोड़ रुपये का FRP पेमेंट किया है। शुगर कमिश्नरेट की तरफ़ से दी गई जानकारी के मुताबिक, पेराई कर रही 206 शुगर मिलों में से 157 मिलों ने 15 फरवरी के आखिर तक पूरा FRP पेमेंट नहीं किया है। सिर्फ़ 49 मिलों ने 100 परसेंट FRP पेमेंट किया है। 31 जनवरी तक राज्य में 870.11 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई हो चुकी है।
इस गन्ने के लिए (कटिंग और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट मिलाकर) कुल एफआरपी 33,697 करोड़ रुपये है। इसमें से 29,382 करोड़ रुपये (कटिंग और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट मिलाकर) का भुगतान किया गया हैं। 49 फैक्ट्रियों ने 100 परसेंट एफआरपी दिया है। 58 फैक्ट्रियों ने 80 से 99.99 परसेंट एफआरपी दिया है। 58 फैक्ट्रियों ने 60 से 79.99 परसेंट एफआरपी किसानों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है। 41 फैक्ट्रियों ने 60 परसेंट से कम एफआरपी दिया है। इस समय के आखिर में पता चला है कि फैक्ट्रियों पर 4,315 करोड़ रुपये का एफआरपी बकाया है।


















