पटना : राज्य में सहकारी खेती की संभावनाओं का पता लगाने के उद्देश्य से, बिहार के सहकारिता मंत्री प्रमोद कुमार ने 23 फरवरी, 2026 को घोषणा की कि, सहकारी समितियों से जुड़े 50-50 सदस्यों की टीमें सहकारी खेती का अध्ययन करने के लिए गुजरात भेजी जाएंगी। कुमार ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि, छोटे भूमि जोतों को देखते हुए राज्य में सहकारी खेती की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने आगे कहा, विभाग की सहकारी समितियों से जुड़े 50-50 सदस्यों की टीमें गुजरात का दौरा करेंगी और देखेंगी कि वहां लोग सहकारी खेती कैसे कर रहे हैं और इससे रोजगार के अवसर कैसे पैदा हो रहे हैं।
इस अध्ययन का बिहार में गन्ना समेत अन्य फसलों का उत्पादन बढाने में फायदा हो सकता है। बिहार सरकार द्वारा राज्य में 25 नई और 9 बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की योजना बनाई गई है। चीनी मिलों को पूरी क्षमता के साथ चलाने के लिए राज्य में गन्ना उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।बिहार के अध्ययन दौरे का किसानों का फायदा हो सकता है।
बिहार में सहकारी खेती की अपार संभावनाएँ देखते हुए मंत्री ने कहा, राज्य के किसानों के पास अब बड़े भू-भाग नहीं हैं। पहले किसानों के पास 100 एकड़, 150 एकड़ या 200 एकड़ जमीन हुआ करती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब जमीन के टुकड़े छोटे-छोटे हिस्सों में बँट गए हैं। हम राज्य में सहकारी खेती की संभावनाओं का पता लगा रहे हैं।कुमार ने कहा कि, सहकारिता में रोजगार के अवसर प्रदान करने की क्षमता है और विभाग सहकारी समितियों के माध्यम से रोजगार सृजन की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
इस बीच, राज्य के सहकारिता विभाग ने सोमवार (23 फरवरी) को नई दिल्ली स्थित नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के साथ मधुबनी जिले के सकरी और दरभंगा जिले के रैयाम में बंद पड़ी दो चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। रायम मिल की स्थापना 1914 में हुई थी, जबकि साकरी मिल की स्थापना 1933 में हुई थी। इस अवसर पर मंत्री जी के साथ सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह, रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां रजनीश कुमार सिंह, अतिरिक्त रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां राम नरेश पांडे और अन्य उपस्थित थे।


















