अहिल्यानगर: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सहकार महर्षि शिवाजीराव नागवडे कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री पर 1 करोड़ 6 लाख 7 हजार 90 रुपये का जुर्माना लगाया है। फैक्ट्री में स्लज टैंक फटने और दूषित पानी घोड़ नदी बेसिन और आसपास के इलाके में फैलने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के कारण हुआ है। साथ ही, बचाव के उपायों के लिए 75 लाख रुपये और सुधार के कामों के लिए 51 लाख रुपये खर्च करने का भी निर्देश दिया है। फैक्ट्री को कुल 2 करोड़ 32 लाख रुपये देने होंगे। ‘लोकमत’ में प्रकशित खबर के मुताबिक, सचिन सुदाम पाचपुते ने इस बारे में ग्रीन ट्रिब्यूनल में शिकायत की थी। 10 फरवरी, 2022 को फैक्ट्री के सीवेज टैंक में धमाका हुआ, जिससे लगभग 10,000 से 12,000 मीट्रिक टन सीवेज फैल गया। धमाके से सीवेज फैक्ट्री के आस-पास की खेती की ज़मीन और पास के एक नेचुरल नाले (मलिचा ओढ़ा) और घोड़ नदी में फैल गया था।
धमाके की वजह से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की दीवार गिर गई और पर्यावरण और किसानों को बहुत नुकसान हुआ। इस सीवेज के एसिडिक नेचर और टेम्परेचर की वजह से इलाके के 5 यूकेलिप्टस के पेड़ जल गए। ऐसे मामले आर्बिट्रेटर के ध्यान में लाए गए। न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह एवं डॉ. सुजीत कुमार बाजपेयी की पीठ ने फैक्ट्री पर एक करोड़ छह लाख सात हजार 90 रुपये का पर्यावरण जुर्माना लगाने के साथ ही उसे निवारक उपायों पर 75 लाख रुपये और सुधारात्मक कार्यों पर 51 लाख रुपये खर्च करने का निर्देश दिया है। इस तरह फैक्ट्री को कुल दो करोड़ 32 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।

















