महाराष्ट्र : चीनी उद्योग आर्थिक संकट में फंसा; मदद के लिए मुख्यमंत्री से मिलने की तैयारी

छत्रपति संभाजीनगर : राज्य के चीनी मिलर्स के अनुसार, पेराई के बाद प्रति टन औसत नुकसान 700 रुपये तक हो रहा है, और इससे आर्थिक संकट दिनोंदिन गहरा रहा है। साथ ही, राज्य के मिलर्स को पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा एथेनॉल आवंटन घटने से मुसीबतें और बढ़ गई है। इसके मद्देनजर राज्य के चीनी मिलर्स मदद के लिए सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने की तैयारी कर रही हैं।

लोकसत्ता में प्रकाशित खबर के अनुसार, इस संबंध में हाल ही में सहकारिता मंत्री पाटिल की मौजूदगी में एक मीटिंग हुई थी।चीनी की बिक्री कीमत के साथ-साथ एथेनॉल उत्पादन, आवंटन और कीमत आदि मुद्दे भी गंभीर हो गए हैं। राज्य की एथेनॉल प्रोडक्शन कैपेसिटी 345.76 लाख करोड़ लीटर है। हालांकि, चूंकि केंद्र सरकार ने इस साल पेट्रोलियम कंपनियों को सप्लाई करने के लिए केवल 100 लाख लीटर दिया है, इसलिए एथेनॉल से प्रॉफिट नहीं मिलेगा, ऐसा चीनी मिलों का दावा है।

चीनी मिलों के बढ़ते नुकसान को देखते हुए हाल ही में केंद्र सरकार से तुरंत कदम उठाने की अपील करने के लिए एक मीटिंग हुई थी।इस मीटिंग में सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल, पूर्व मंत्री हर्षवर्धन पाटिल, पूर्व मंत्री राजेश टोपे, जयप्रकाश दांडेगांवकर मौजूद थे। इस मीटिंग में मांग की गई कि, चीनी की MSP को बढ़ाया जाए। इस बारे में बात करते हुए जयप्रकाश दांडेगांवकर ने कहा, पिछले कुछ दिनों में फैक्ट्रियां औसतन 110 दिनों से भी कम समय से चल रही हैं। FRP और चीनी की कीमतों के बीच का अंतर बढ़ रहा है। नतीजतन, घाटा बढ़ रहा है।एथेनॉल जैसे प्रोडक्ट्स से भी प्रॉफिट कमाना मुश्किल हो गया है। पिछले दो सालों से एथेनॉल की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब कम प्रोडक्शन की वजह से नुकसान भी ज़्यादा हो गया है।

पिछले कुछ दिनों में चीनी उद्योग में हुए घाटे को देखते हुए, एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलकर केंद्र और राज्य सरकारों के साथ कोऑर्डिनेशन में कुछ फ़ैसले लेगा और बाद में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह से इस मामले को सुलझाने की रिक्वेस्ट करने का फ़ैसला किया गया है। पहले, एक टन गन्ने की पेराई के बाद कितने रुपये का नुकसान होता है, इसका डेटा इकट्ठा किया जा रहा था। अब कहा जा रहा है कि, इस नुकसान में एथेनॉल का भी हिस्सा है। राज्य में 156 डिस्टलरी प्रोजेक्ट हैं, जिनमें से 79 प्रोजेक्ट कोऑपरेटिव चीनी मिलों में और 54 प्रोजेक्ट प्राइवेट चीनी मिलों में हैं। अकेले डिस्टलरी प्रोजेक्ट की संख्या 23 है। 30 जनवरी के आंकड़ों के मुताबिक, 63.4 करोड़ लीटर एथेनॉल सप्लाई करने की इजाज़त दी गई थी। इसमें से 43.68 करोड़ लीटर एथेनॉल पेट्रोल में मिलाने के लिए सप्लाई किया जा चुका है।

वेस्टर्न इंडिया शुगर मिल्स के चेयरमैन बी. बी. ठोंबरे ने कहा, पिछले साल से मिला एलोकेशन कैपेसिटी का सिर्फ 32 परसेंट है। इसके उलट, केंद्र सरकार अनाज से एथेनॉल बनाने पर फोकस कर रही है। असल में, पिछले 30 सालों में काफी कैपेसिटी बनाई गई। अगले दस सालों में कितना एथेनॉल मिलेगा, इसका गारंटी लेटर लिखने के बाद अब डिमांड कम होने से घाटा बढ़ रहा है। चीनी का MSP 31 रुपये रखा गया है। जब यह तय हुआ था, तब गन्ने का दाम 2750 रुपये था। अब गन्ना मूल्य 3550 रुपये हो गया है, लेकिन MSP में बढ़ोतरी नही हुई है। इस वजह से मिलों का घाटा बढ़ रहा है।

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