बेंगलुरु : मौजूदा पेराई सीजन की जानकारी देते हुए गन्ना मंत्री शिवानंद पाटिल ने कहा की, कर्नाटक में अब तक 521 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई हो चुकी है, और सीजन के दौरान लगभग 600 लाख मीट्रिक टन की पेराई होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि, 2025-26 सीजन में 81 चीनी मिलों ने पेराई में हिस्सा लिया था, जिनमें से 29 मिलें बंद हो चुकी है।उनके अनुसार, पेराई सीजन मार्च के पहले हफ्ते तक खत्म होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा, कर्नाटक सरकार ने 2025-26 सीज़न के लिए गन्ना उगाने वालों को आर्थिक मदद के तौर पर 300 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिसमें से 50 रुपये प्रति टन सीधे उन किसानों के खाते में डाले जाएंगे जिन्होंने पूरे राज्य में चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई किया था। उन्होंने कहा, फाइनेंशियल मदद का कैलकुलेशन 600 लाख मीट्रिक टन की अनुमानित पेराई के आधार पर किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि यह मदद फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (FRP) के अलावा 100 रुपये प्रति टन देने के राज्य के वादे का हिस्सा है, जिसका बोझ सरकार और चीनी मिलों के बीच बराबर बांटा जाएगा।
पिछले साल 8 नवंबर को मुख्यमंत्री ने विधान सौध में चीनी मिल मालिकों और गन्ना किसानों की एक मीटिंग बुलाई थी, जिसमें FRP के अलावा 100 रुपये प्रति टन देने का फैसला किया गया था।पाटिल ने कहा, यह तय किया गया कि 100 रुपये की मदद में से राज्य सरकार 50 रुपये देगी और चीनी मिल 50 रुपये देंगी। उन्होंने आगे कहा कि, सरकार ने अब इस फैसले के मुताबिक 300 करोड़ रुपये का अपना हिस्सा जारी कर दिया है।
चीनी मिलों के दिए गए प्रस्तावों के आधार पर, गन्ना विकास कमिश्नर डिप्टी कमिश्नरों को फंड जारी करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पक्का करने के लिए निर्देश दिए गए हैं कि सप्लाई किए गए गन्ने की मात्रा के आधार पर किसानों के बैंक अकाउंट में 50 रुपये प्रति टन सीधे जमा किए जाएं। इसी तरह, डिप्टी कमिश्नरों को यह पक्का करने के निर्देश दिए गए हैं कि चीनी मिल मैनेजमेंट योग्य किसानों को 50 रुपये प्रति टन का अपना हिस्सा दें।


















