टैरिफ पर US कोर्ट का फैसला भारत के लिए पॉजिटिव, रुपये को सहारा मिलने की संभावना: रिपोर्ट

नई दिल्ली : JM फाइनेंशियल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूनाइटेड स्टेट्स के सुप्रीम कोर्ट का हाल ही में आया फैसला, जिसमें इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लाए गए टैरिफ उपायों को रद्द कर दिया गया है, भारत समेत उभरते मार्केट (EM) इकॉनमी के लिए पॉजिटिव होने की उम्मीद है, और इससे US डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये को कमजोरी से बचाया जा सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि, कोर्ट के फैसले से ग्लोबल ट्रेड का माहौल और भी ज़्यादा उम्मीद के मुताबिक बनेगा, जिससे इंटरनेशनल ट्रेड एक्टिविटी पर टैरिफ वेपनाइजेशन का असर कम होगा।इस डेवलपमेंट से भारत समेत उभरते मार्केट इकॉनमी को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में कहा गया है, कोर्ट का फैसला भारत समेत उभरते मार्केट इकॉनमी के लिए पॉजिटिव होगा, क्योंकि इससे ट्रेड एक्टिविटी टैरिफ के वेपनाइजेशन से प्रभावित नहीं होगी।यूनाइटेड स्टेट्स के सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत वाले फैसले में, IEEPA के तहत प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लाए गए टैरिफ उपायों को रद्द कर दिया। इस फैसले को ग्लोबल ट्रेड डायनामिक्स में एक अहम डेवलपमेंट के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इससे टैरिफ लगाने से जुड़ी अनिश्चितता का एक बड़ा सोर्स खत्म हो गया है।

इस फैसले के बाद, प्रेसिडेंट ट्रंप ने ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 का इस्तेमाल करके 10 परसेंट का टेम्पररी ग्लोबल टैरिफ लगाया, जिसे बाद में बदलकर 15 परसेंट कर दिया गया, और इसे अमान्य मौजूदा ड्यूटी के तुरंत विकल्प के तौर पर पेश किया गया।जेएम फाइनेंशियल ने कहा कि, कोर्ट का ओरिजिनल फैसला एक ऐसा ट्रेड माहौल बनाने में मदद करेगा जिसका अनुमान लगाया जा सके, जिससे उभरती मार्केट इकॉनमी को फायदा होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है, हमारा मानना है कि कोर्ट का फैसला अपने ओरिजिनल रूप में ग्लोबल ट्रेड प्रैक्टिस के मामले में एक ऐसा अनुमान लगाया जा सकने वाला माहौल बनाएगा जिससे भारत समेत उभरती मार्केट इकॉनमी को फायदा होगा।हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर दूसरे टैरिफ उपाय लागू किए जाते हैं तो फायदे कम हो सकते हैं।

इसमें आगे कहा गया है, अगर ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन कोर्ट के फैसले को दरकिनार करता है, तो उभरते मार्केट इकॉनमी को मिलने वाला फायदा काफी कम हो जाएगा।रिपोर्ट में बताया गया है कि, बजट लैब के अनुसार, कोर्ट के फैसले से पहले इंपोर्ट पर एवरेज टैरिफ लगभग 16 परसेंट था, जिसके फैसले के बाद घटकर लगभग 9 परसेंट होने की उम्मीद है।हालांकि, अगर ड्यूटी दूसरे तरीकों से लगाई जाती है, तो एवरेज टैरिफ रेट बढ़कर लगभग 14 परसेंट हो सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, US में पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता जल्द ही बढ़ सकती है, जिसका असर ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट और ट्रेड फ्लो पर पड़ सकता है।इसमें आगे कहा गया है कि, US ग्रोथ और कर्ज की चिंताओं को लेकर अनिश्चितता सोने जैसे सेफ-हेवन एसेट्स की डिमांड बढ़ा सकती है।साथ ही, कमजोर ग्रोथ चिंताओं के कारण US डॉलर पर दबाव भारतीय रुपये सहित उभरते बाजारों की करेंसी को सहारा दे सकता है।

इसलिए रिपोर्ट में बताया गया है कि कोर्ट के फैसले से ग्लोबल ट्रेड में प्रेडिक्टेबिलिटी में सुधार करके उभरते बाजारों की अर्थव्यवस्थाओं को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।हालांकि, आखिरी असर US एडमिनिस्ट्रेशन के आगे के पॉलिसी एक्शन पर निर्भर करेगा। (ANI)

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