अमेरिका-ईरान संघर्ष : केंद्र सरकार चीनी समेत अन्य क्षेत्र के निर्यातकों को सहायता देगी

नई दिल्ली: फाइनेंशियल एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के मुताबिक, केंद्र सरकार पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण माल भेजने में कठिनाई का सामना कर रहे निर्यातकों, जिनमें चीनी क्षेत्र के निर्यातक भी शामिल हैं, की सहायता के लिए उपायों पर विचार कर रही है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि, निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत नीतिगत उपायों का उपयोग संकट से प्रभावित निर्यातकों की सहायता के लिए किया जा सकता है।

भारतीय विदेश व्यापार संस्थान द्वारा आयोजित कुलपति सम्मेलन के दौरान गोयल ने कहा कि, एक अंतर-मंत्रालयी समूह क्षेत्र में व्यवधान से उत्पन्न चुनौतियों को समझने के लिए निर्यातकों के साथ नियमित संपर्क में है। वाणिज्य मंत्रालय संघर्ष के कारण विलंबित माल से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए जहाजरानी मंत्रालय के साथ समन्वय भी कर रहा है।

चीनी और अन्य वस्तुओं का व्यापार करने वाले निर्यातकों को 28 फरवरी को संकट शुरू होने के बाद से ही बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने और क्षेत्र के कई बंदरगाहों पर हमले के कारण पश्चिम एशिया जाने वाले कई शिपमेंट फिलहाल फंसे हुए हैं। पश्चिम एशिया न केवल चीनी जैसे भारतीय निर्यात के लिए एक प्रमुख गंतव्य है, बल्कि एक महत्वपूर्ण ट्रांसशिपमेंट हब भी है। इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले शिपिंग मार्ग अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के बाजारों में जाने वाले माल के लिए सबसे छोटा मार्ग प्रदान करते हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 147 कंटेनर जहाज वर्तमान में इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं। लगभग 105 जहाज फारस की खाड़ी के अंदर फंसे हुए हैं, जबकि शेष जहाज ओमान की खाड़ी के पास माल उतारने के स्पष्ट निर्देशों के बिना इंतजार कर रहे हैं। कई प्रमुख शिपिंग कंपनियों ने “यात्रा समाप्त” घोषित कर माल को सुरक्षित बंदरगाहों की ओर मोड़ दिया है। इनमें सलालाह बंदरगाह, जेद्दा इस्लामिक बंदरगाह, किंग अब्दुल्ला बंदरगाह और कोलंबो बंदरगाह शामिल हैं।

इस व्यवधान ने अन्य वैश्विक बाजारों के शिपिंग मार्गों को भी प्रभावित किया है। अमेरिका और यूरोप जाने वाले माल को अब केप ऑफ गुड होप के रास्ते डायवर्ट किया जा रहा है, जिससे पारगमन समय 14 से 21 दिन बढ़ गया है और माल ढुलाई लागत में भी वृद्धि हुई है। शिपिंग कंपनियों ने प्रभावित क्षेत्र से गुजरने वाले माल पर 40 फुट के कंटेनर पर 2,000 से 4,000 डॉलर तक का आकस्मिक शुल्क भी लगाया है। निर्यातकों का कहना है कि ये शुल्क उन शिपमेंट पर भी लगाए जा रहे हैं जो संघर्ष शुरू होने से पहले ही पश्चिम एशियाई बंदरगाहों पर पहुंच चुके थे और अनलोड होने की प्रतीक्षा कर रहे थे।

गोयल ने कहा कि, सरकार निर्यातकों द्वारा विदेशी खरीदारों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए समाधान खोजने हेतु शिपिंग मंत्रालय और शिपिंग कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है। निर्यातकों ने सरकार से अतिरिक्त सहायता की भी मांग की है। प्रमुख मांगों में निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट (आरओडीटीईपी) योजना के तहत उच्च दरें और भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम से बीमा लागत में राहत शामिल हैं। उन्होंने कोविड-19 काल के दौरान दी गई सहायता के समान उच्च कार्यशील पूंजी सीमा और ऋण विस्तार का भी अनुरोध किया है।

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