सातारा: गन्ना मूल्य भुगतान समय पर न मिलने से नाराज़ किसानों और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को गोपूज स्थित ग्रीन पावर शुगर्स के गेट के सामने और कार्यालय में धरना आंदोलन किया। गुस्साए किसानों ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को ऑफिस में ही बंधक बनाया, जिससे तनाव का माहौल बन गया। औंध के पुलिस उपनिरीक्षक मयेकर और पुलिस हवलदार साहिल झारी ने बीच-बचाव किया। इसके बाद असिस्टेंट जनरल मैनेजर ने लिखित पत्र देने पर आखिरकार शाम को मामला सुलझा।
‘गोपूज’ चीनी मिल प्रशासन ने अब तक तीन बार भुगतान की तारीख घोषित की थी, लेकिन किसानों का आरोप है कि हर बार ये तारीखें झूठी साबित हुईं।किसानों ने कहा, हर बार तारीख दी जाती है, लेकिन पैसे हमारे खाते में जमा नहीं होते। इससे हमारी आर्थिक परेशानी बढ़ती जा रही है। खेती के लिए जरूरी खाद, बीज, दवाइयाँ, घरेलू खर्च, सोसायटी का कर्ज और ब्याज चुकाने के लिए किसान गन्ने के भुगतान पर ही निर्भर रहते हैं। लेकिन भुगतान न मिलने से कई किसान कर्ज के जाल में फँस गए हैं। किसानों ने साफ कहा कि, अब आश्वासन नहीं, हमें पैसे चाहिए।
इस दौरान स्वाभिमानी संगठन के विकास गोडसे, सत्यवान गलंडे, गौरव पवार, शंकर पवार, चैतन्य पवार, संजय गोडसे, राजेंद्र गोडसे, तानाजी गोडसे, दत्तात्रय माने, संतोष गोडसे, बाळू इंगळे, सचिन खुस्पे, बापू पवार समेत लगभग 60 से 70 किसान मौजूद थे। किसानों के इस आंदोलन के कारण कुछ समय के लिए इलाके में तनाव का माहौल बना रहा। बाद में फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से असिस्टेंट जनरल मैनेजर घुले ने किसानों से चर्चा कर 13 मार्च तक भुगतान करने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद देर शाम किसानों ने मिल परिसर छोड़ दिया। हालांकि, किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि 13 मार्च तक भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस दौरान औंध पुलिस स्टेशन की ओर से कड़ा पुलिस बंदोबस्त भी किया गया था।


















