कोल्हापुर: कोल्हापुर विभाग की चीनी मिलों का सीजन समाप्त हो गया है। लेकिन कोल्हापुर और सांगली जिलों की चीनी मिलों पर अब भी किसानों का लगभग 1000 करोड़ रुपये का एफआरपी (FRP) बकाया है। वित्तीय संस्थाओं से लिए गए फसल ऋण की किस्तें समय पर न भर पाने के कारण किसानों पर ब्याज का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जिससे किसान संगठन आक्रामक हो गए हैं।
आंदोलन अकुंश संगठन ने दावा किया की, किसान परेशान हैं, लेकिन क्षेत्रीय चीनी सह-निदेशक कार्यालय चुप बैठा है।नवंबर के पहले सप्ताह में ही कोल्हापुर विभाग की चीनी मिलों का पेराई सीजन शुरू हो गया था। किसानों को उम्मीद रहती है कि, गन्ने के भुगतान समय पर मिलेंगे ताकि वे सहकारी संस्थाओं और बैंकों से लिए गए फसल ऋण की समय पर अदायगी कर सकें। लेकिन विभाग की 29 चीनी मिलों पर करीब 1000 करोड़ रुपये बकाया हैं। पिछले दो वर्षों से थोक बाजार में चीनी के अच्छे दाम मिल रहे हैं। इस साल भी कीमत 38 से 40 रुपये प्रति किलो के आसपास स्थिर रही है। ऐसे में चीनी मिलें ‘शॉर्ट मार्जिन’ कैसे दिखा रही हैं, यह सवाल किसान उठाने लगे हैं।
इन मिलों द्वारा शत प्रतिशत एफआरपी भुगतान…
जवाहर, कोल्हापुर
दत्त- शिरोळ, कोल्हापुर
शरद-नरंदे, कोल्हापुर
तात्यासाहेब कोरे, वारणानगर, कोल्हापुर
अथणी (गायकवाड) – कोल्हापुर
डालमिया (आसुर्ले-पोर्ले) – कोल्हापुर
अथणी (तांबाले) – कोल्हापुर
नाईक, शिराळा – सांगली
डालमिया (कोकरुड) – सांगली
रायबाग, डफळापुर – सांगली
किसान संगठनों का आरोप है कि, चीनी मिल मालिकों ने स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव में किसानों के पैसे खर्च किए हैं। जब चीनी के दाम अच्छे हैं, तब शॉर्ट मार्जिन दिखाकर मिल मालिक किसानों को गुमराह कर रहे हैं। आंदोलन अकुंश संगठन के अध्यक्ष धनाजी चुडमुंगे ने कहा की, 1000 करोड़ रुपये के गन्ना बिल बकाया होने के बावजूद क्षेत्रीय चीनी सह-निदेशक चुप बैठे हैं। यह बकाया अब तक के सह-निदेशकों के कार्यकाल में रिकॉर्ड स्तर का है। यदि संबंधित मिलों पर कार्रवाई कर किसानों का भुगतान नहीं किया गया, तो संघर्ष अवश्य होगा।


















