पटना: उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, राज्य सरकार जल्द ही चीनी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ‘इंसेंटिव पॉलिसी 2026’ का मसौदा लाएगी। उन्होंने कहा कि, सरकार का उद्देश्य गन्ना खेती और चीनी उद्योग को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाना और बिहार के युवाओं को राज्य में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। गन्ना उद्योग विभाग द्वारा आयोजित ‘गन्ना प्रौद्योगिकी सेमिनार–2026’ सेमिनार को संबोधित करते हुए चौधरी ने कहा कि, प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से चीनी उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि, सरकार अगले पांच वर्षों में 25 चीनी मिलें खोलने के लिए प्रतिबद्ध है।
गन्ना उद्योग मंत्री संजय पासवान ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार में चीनी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि, औद्योगिक विकास सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है। बिहार ने बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने और 25 नई इकाइयां स्थापित करने का संकल्प लिया है, ताकि निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके।
सेमिनार के पहले दिन 700 से अधिक किसान और 100 वैज्ञानिक शामिल हुए, जिन्होंने गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए तकनीकी नवाचारों और रणनीतियों पर चर्चा की। उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार बिहार राज्य औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2016 को लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य राज्य में तेज औद्योगिक विकास, अधिक निवेश और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा, इस प्रोत्साहन नीति में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के तहत मुख्य रूप से गन्ने को शामिल किया गया है, ताकि गन्ना आधारित चीनी और एथेनॉल उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सके और नए रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें।
उन्होंने कहा, गन्ना बिहार की प्रमुख नकदी फसलों में से एक है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यह क्षेत्र केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों किसानों की आजीविका और हजारों मजदूरों के रोजगार से सीधे जुड़ा हुआ है। हम चीनी, गुड़, गन्ना और इसके उप-उत्पादों के माध्यम से एथेनॉल और बिजली उत्पादन को भी बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का विकास होगा और औद्योगिक निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।

















