E10 नीति : नेपाल सरकार की नई नीति के बाद एथेनॉल उद्योग में निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

काठमांडू: नेपाल सरकार द्वारा पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की नीति लागू किए जाने के बाद निजी और गैर-आवासीय नेपाली (एनआरएन) निवेशकों की वैकल्पिक ईंधन उत्पादन में दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। “पेट्रोल में एथेनॉल उपयोग आदेश, 2082” को मंजूरी मिलने के बाद देश में एथेनॉल उत्पादन और उसे पेट्रोल में मिलाकर बिक्री के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार हो गया है। मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) अब पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण शुरू करने की तैयारी कर रहा है। प्रबंध निदेशक डॉ. चंडिका प्रसाद भट्टा ने बताया कि, प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद निगम एथेनॉल उत्पादन, खरीद और मिश्रण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करेगा। इस पहल से पेट्रोल आयात कम होगा, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन में भी कमी आएगी, जिससे ईंधन का उपयोग अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनेगा।

इस नीति के बाद नेपाली प्रवासी निवेशकों से भी बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। अमेरिका में बसे गैर-आवासीय नेपाली निवेशकों ने नेपाल में कियान केमिकल्स इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए लगभग 1.2 अरब रुपये के निवेश की योजना है, जिसके तहत देश में एथेनॉल उत्पादन किया जाएगा।कंपनी की योजना पर्सा, कोशी और लुंबिनी प्रांत में तीन प्लांट स्थापित करने की है, जिनमें उत्पादन, कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला और प्रसंस्करण क्षमता विकसित की जाएगी। यह परियोजना लागू होने पर लगभग 2,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है, जबकि करीब 20 लाख लोग कच्चे माल के उत्पादन, खासकर कसावा की खेती से जुड़ सकते हैं, जिससे किसानों के लिए नई आय के अवसर पैदा होंगे।

नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन के अध्ययन के अनुसार, पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने से प्रतिदिन लगभग 4 लाख लीटर पेट्रोल की खपत कम हो सकती है। नेपाल में वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 20 लाख लीटर पेट्रोल की खपत होती है, जो सालाना करीब 7.3 करोड़ लीटर है। यदि 10 प्रतिशत मिश्रण लागू किया जाता है, तो हर साल लगभग 73 लाख लीटर पेट्रोल आयात कम किया जा सकता है। एनओसी भारतीय ऑयल कॉर्पोरेशन से करीब 85 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल खरीदता है। ऐसे में आयात में कमी आने से देश को हर साल 600 मिलियन रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचत हो सकती है। उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय ने भी इसी तरह के आयात में कमी के लाभ का अनुमान लगाया है।एथेनॉल उत्पादन के लिए मोलासेस, नेपियर घास, फसल अवशेष और अनुपयोगी अनाज जैसे कृषि और जैविक संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। इससे कृषि उत्पादों के बेहतर उपयोग के साथ किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे।

उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि, एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार को प्रोत्साहन देना चाहिए। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी, क्योंकि कृषि अपशिष्ट और अन्य बायोमास का उपयोग किया जा सकेगा। नए आदेश के अनुसार, एथेनॉल का उत्पादन उन अनाजों से नहीं किया जा सकेगा जो सीधे खाद्य उपयोग में आते हैं, और उत्पादित एथेनॉल केवल नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को ही बेचा जाएगा। नेपाल ब्यूरो ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड मेट्रोलॉजी इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा और उत्पादन प्रक्रिया को पर्यावरण के अनुकूल रखना अनिवार्य होगा। एथेनॉल की कीमत कैबिनेट द्वारा उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय की सिफारिशों के आधार पर तय की जाएगी। दरअसल, पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की योजना लगभग दो दशक पहले 2060 बीएस में भी विचाराधीन थी, लेकिन आवश्यक प्रक्रियाओं और उत्पादन ढांचे के अभाव में इसे लागू नहीं किया जा सका। अब नई नीति और कानूनी व्यवस्था के साथ सरकार को उम्मीद है कि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार होगा, जिससे पेट्रोल आयात में कमी, विदेशी मुद्रा की बचत और ग्रामीण रोजगार में वृद्धि संभव हो सकेगी।

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