काठमांडू: नेपाल सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की अनुमति देने वाली नई नीति लागू की है। इसका उद्देश्य ईंधन आयात को कम करना और घरेलू कृषि संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना है। “पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने और उपयोग से संबंधित आदेश, 2026” शीर्षक वाला यह निर्देश मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद शुक्रवार को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। नई व्यवस्था के तहत नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन पेट्रोल के प्रति लीटर में उपलब्धता के अनुसार अधिकतम 10 प्रतिशत तक एथेनॉल मिला सकेगी। आवश्यकता पड़ने पर मंत्रिपरिषद इस मिश्रण सीमा में बदलाव भी कर सकती है।
एथेनॉल का उत्पादन शीरा (मोलासेस), नेपियर घास, कृषि अवशेष, वन आधारित बायोमास, भूसा, मक्के के डंठल, कसावा और खराब या क्षतिग्रस्त अनाज जैसे कच्चे माल से किया जा सकेगा। खाद्य आपूर्ति पर असर न पड़े, इसलिए खाने योग्य अनाज के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। नीति के अनुसार उत्पादकों को एथेनॉल केवल नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को ही आपूर्ति करना होगा। खरीद से पहले निगम इसकी गुणवत्ता की जांच करेगा।एथेनॉल की कीमत हर वर्ष सरकार की एक समिति की सिफारिश के आधार पर तय की जाएगी और यह प्रत्येक वित्तीय वर्ष के पहले दिन से लागू होगी।
एथेनॉल अत्यधिक ज्वलनशील होने के कारण उद्योगों को कड़े सुरक्षा मानकों के तहत इसका परिवहन करना होगा। सरकार ने मूल्य निर्धारण और प्रोत्साहन संबंधी सुझाव देने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समिति भी गठित की है, जो कर राहत और कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले किसानों को सहायता जैसे उपायों पर भी सिफारिश करेगी। अधिकारियों का कहना है कि, इस नीति से कृषि अपशिष्ट के उपयोग में वृद्धि होगी, ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हालांकि इसकी सफलता कच्चे माल की उपलब्धता और उद्योगों की उत्पादन क्षमता पर निर्भर करेगी।


















