सूरत : गुजरात के सूरत जिले में एक सहकारी चीनी मिल से जुड़ा कथित वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।ओलपाड पुलिस स्टेशन ने तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिनमें एक सहकारी चीनी मिल के पूर्व प्रबंध निदेशक और सूरत पीपल्स को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के पूर्व प्रबंध निदेशक शामिल हैं। इंडियन कोओपरेटिव में प्रकाशित खबर के मुताबिक, आरोप है कि इन्होंने चीनी के स्टॉक से जुड़े फर्जी दस्तावेज जमा कर नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NCDC) से ऋण प्राप्त किया। यह शिकायत वर्तमान में श्री कंठा विभाग सहकारी खंड उद्योग मंडली लिमिटेड के कार्यों का प्रबंधन कर रही कस्टोडियन कमेटी के चेयरमैन बृजेशभाई उर्फ वायरलभाई गुणवंतभाई पटेल ने दर्ज कराई है। एफआईआर के अनुसार यह कथित अनियमितताएं वर्ष 2023 में उस समय हुईं जब सहकारी चीनी मिल का संचालन उसके पूर्व बोर्ड और प्रबंधन द्वारा किया जा रहा था।
शिकायत के अनुसार, आरोपियों में चीनी सहकारी संस्था के पूर्व प्रबंध निदेशक प्रदीपकुमार गौतमभाई पंड्या, गोदाम कीपर प्रदीपकुमार भगुभाई पटेल और सूरत पीपल्स को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक जतिनभाई ईश्वरभाई नायक शामिल हैं। नायक वर्तमान में सर्वोदय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। आरोप है कि, इन्होंने एनसीडीसी से ऋण प्राप्त करने के लिए साजिश के तहत फर्जी स्टॉक सत्यापन दस्तावेज तैयार किए। एफआईआर के अनुसार, मार्च 2023 में चीनी मिल ने चीनी के स्टॉक को गिरवी रखकर कार्यशील पूंजी ऋण के लिए एनसीडीसी में आवेदन किया था। आवेदन और बोर्ड की मंजूरी के आधार पर जून 2023 में एनसीडीसी ने लगभग 6.29 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया, जो 23,882 क्विंटल चीनी के स्टॉक के आधार पर दिया गया था।
इसके बाद नवंबर 2023 में एनसीडीसी को जमा कराए गए दस्तावेजों में यह दावा किया गया कि मिल के पास 59,402 क्विंटल चीनी का स्टॉक है, जिसके आधार पर लगभग 9.35 करोड़ रुपये का एक और ऋण स्वीकृत किया गया।हालांकि, शिकायत के अनुसार 17 नवंबर 2023 को की गई भौतिक जांच में मिल में केवल लगभग 4,022 क्विंटल चीनी ही उपलब्ध पाई गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, वास्तविक स्टॉक बहुत कम होने के बावजूद आरोपियों ने कथित तौर पर अधिक स्टॉक दिखाते हुए फर्जी भौतिक सत्यापन रिपोर्ट तैयार की और उसी के आधार पर ऋण प्राप्त किया। एफआईआर में यह भी कहा गया है कि चीनी मिल, एनसीडीसी और सूरत पीपल्स को-ऑपरेटिव बैंक के बीच एक त्रिपक्षीय व्यवस्था के तहत बैंक की जिम्मेदारी गिरवी रखे गए स्टॉक की निगरानी करने और चीनी बिक्री से प्राप्त राशि को ऋण चुकाने के लिए जमा करवाने की थी।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए सूरत पीपल्स को-ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन अमित गज्जर ने इंडियन कोऑपरेटिव से कहा कि, बैंक को इस एफआईआर के बारे में हाल ही में जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि मामला शुक्रवार को सामने आया और सप्ताहांत के कारण बैंक ने सोमवार शाम को बोर्ड बैठक बुलाकर इस मुद्दे की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा, संक्षेप में कहें तो बैंक को कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है और इसमें बैंक के धन का सीधा उपयोग नहीं हुआ है। यह मामला त्रिपक्षीय समझौते और ऑडिट से जुड़ी कुछ प्रक्रियागत चूकों से संबंधित प्रतीत होता है। बोर्ड ने पहले एक प्रस्ताव पारित कर तत्कालीन प्रबंध निदेशक जतिनभाई नायक को आवश्यक प्रक्रियाएं, जिसमें ऑडिट से जुड़ा कार्य भी शामिल है, पूरा करने का अधिकार दिया था।गज्जर ने कहा कि, बोर्ड इस मामले की विस्तार से जांच करेगा।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि, चीनी की बिक्री से प्राप्त राशि निर्धारित तरीके से जमा नहीं की गई और एनसीडीसी से प्राप्त ऋण का दुरुपयोग किया गया। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 15.65 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किया गया, जिसे अब तक वापस नहीं किया गया है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 465, 467, 468, 471 और 120बी के तहत मामला दर्ज किया है। ओलपाड पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है और जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आने पर उनके नाम भी जोड़े जा सकते हैं।


















