पटना: राज्य सरकार द्वारा वर्षों से बंद पड़ी मढ़ौरा शुगर मिल को फिर से शुरू करने की पहल अब जमीन पर दिखाई देने लगी है। रविवार को तमिलनाडु से आए निवेशकों ने सारण जिले में स्थित बंद मढ़ौरा शुगर मिल का निरीक्षण किया। उन्होंने मिल परिसर की मौजूदा स्थिति और वहां उपलब्ध बुनियादी ढांचे का आकलन किया। साथ ही गन्ना किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली।
एनडीए सरकार ने ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के तहत बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने और राज्य में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। अधिकारी ने बताया, राज्य सरकार की पहल पर एसएनजे ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर एस. एन. जयमुरुगन, वाइस-चेयरमैन कृष्णा और समूह के ऑडिटर बिमलेंद्र मिश्रा ने गन्ना उद्योग विभाग के अधिकारियों के साथ रविवार को मढ़ौरा शुगर मिल का निरीक्षण किया और उसकी वर्तमान स्थिति का आकलन किया।
दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र के किसानों से मुलाकात की, गन्ना उत्पादन से जुड़ी समस्याओं पर संक्षिप्त चर्चा की और खेतों में गन्ने की फसल की स्थिति भी देखी।निरीक्षण के दौरान राज्य के सहायक गन्ना आयुक्त वेदव्रत कुमार और गन्ना अधिकारी कोमर कानन भी मौजूद थे। मढ़ौरा शुगर मिल (मूल रूप से कॉनपुर शुगर वर्क्स लिमिटेड) की स्थापना 1904 में सारण जिले में हुई थी। यह बिहार की पहली शुगर मिल और भारत की सबसे पुरानी मिलों में से एक थी। लगभग एक सदी तक संचालन के बाद 1997-98 में प्रबंधन समस्याओं, श्रमिक विवादों और आधुनिकीकरण की कमी के कारण यह मिल बंद हो गई।
अपने चरम समय में मढ़ौरा एक औद्योगिक केंद्र था, जहां चार प्रमुख इकाइयाँ थीं—शुगर मिल, मॉर्टन कन्फेक्शनरी (जो अपनी मिठाइयों के लिए प्रसिद्ध थी), सारण डिस्टिलरी और सारण इंजीनियरिंग वर्क्स। मिल बंद होने से सीधे तौर पर 20,000 से अधिक किसान परिवारों और लगभग 1,500 फैक्ट्री कर्मचारियों पर असर पड़ा, जिससे क्षेत्र में बेरोजगारी और पलायन बढ़ गया।
















