पुणे: केंद्र सरकार के विभिन्न पूरक नीतियों के चलते एथेनॉल परियोजनाओं में भारी निवेश हुआ है। केंद्र सरकार ने निवेश को प्रोत्साहित करते हुए ऋणों पर ब्याज सब्सिडी देने का वादा किया था।हालांकि, पिछले दो वर्षों से ब्याज सब्सिडी प्राप्त नहीं हुई है। वेस्ट इंडियन शुगर मिल्स असोसिएशन (विस्मा) ने इस मुद्दे पर ध्यान दिलाने के लिए केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय को पत्र लिखा है। इसमें उल्लेख किया है की, पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया गया है। हालांकि, एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम समय से पहले ही सफल रहा है, लेकिन दूसरी ओर पिछले दो सालों से एथेनॉल परियोजनाओं को ब्याज सब्सिडी का भुगतान नहीं किया गया है।
इसके विपरीत, बैंकों ने दिए गए लोन पर ब्याज वसूल कर लिया है। ‘विस्मा’ ने केंद्र सरकार को बताया है की, चीनी उद्योग ने एथेनॉल परियोजनाओं में 40 हजार करोड़ का निवश किया है। जिसमे लगभग 40 प्रतिशत अकेले महाराष्ट्र से है। इसके आलावा, ‘विस्मा’ ने कहा की एथेनॉल उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत योगदान होने के बावजूद कुछ मिलों का एथेनॉल कोटा 25 से 30 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है, जिससे उद्योग को और नुकसान हो रहा है।
एफआरपी भुगतान में कठिनाइयाँ…
चीनी का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) अब तक छह बार बढ़ाया जा चुका है, लेकिन 2019 से इसकी अधिकतम बिक्री कीमत मात्र 31 रुपये प्रति किलोग्राम ही बनी हुई है।इस वजह से चीनी मिलों को कानून के अनुसार 14 दिनों के भीतर एफआरपी का भुगतान करने में कठिनाई हो रही है।पत्र में यह भी कहा गया है कि, महाराष्ट्र में एफआरपी का बकाया लगभग 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।


















