बैंकाक : थाईलैंड का चीनी उद्योग ऊर्जा सुरक्षा और नेट-जीरो लक्ष्यों को मजबूत करने के लिए E20 ईंधन को अपनाने की मांग कर रहा है। शुगर मिलों का कहना है कि, E20 को मुख्य ईंधन बनाने से हर साल 1.05 अरब लीटर कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी और 4.2 लाख किसान परिवारों की आय बढ़ेगी। थ्री शुगर मिलर्स एसोसिएशंस (TSMC) ने सरकार से कृषि आधारित नवीकरणीय ऊर्जा को राष्ट्रीय एजेंडा में शामिल करने की अपील की है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य देश को वैश्विक बाजार की अस्थिरता से बचाना और आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करना है, जो वर्तमान में कुल मांग का 60–70% है।
एसोसिएशंस की ग्रीन इकोनॉमी योजना का मुख्य केंद्र गैसोहोल E20 को देश का प्रमुख ईंधन बनाना है। इस बदलाव से प्रतिदिन 29 लाख लीटर और सालाना लगभग 1.058 अरब लीटर कच्चे तेल के आयात में कमी आने का अनुमान है।इसके अलावा, समूह ने गन्ने की पत्तियों और कृषि अपशिष्ट से बायोमास बिजली उत्पादन को 650 मेगावाट तक बढ़ाने का सुझाव दिया है, ताकि प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम की जा सके।
TSMC की समन्वय समिति के अध्यक्ष डॉ. सोमचाई हार्नहिरुन ने कहा कि, परिवहन के लिए कच्चे तेल और बिजली उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस के बड़े पैमाने पर आयात के कारण थाईलैंड अभी भी संवेदनशील स्थिति में है।उन्होंने बताया कि, देश में 1.1 करोड़ राय क्षेत्र में खेती होती है, जहां से हर साल 9.2 करोड़ टन गन्ने का उत्पादन होता है, जो बायोफ्यूल और बायोमास उत्पादन के लिए पर्याप्त क्षमता प्रदान करता है।
चीनी उद्योग वर्तमान में थाईलैंड की अर्थव्यवस्था में लगभग 123 अरब बाट का योगदान देता है, जो कृषि जीडीपी का 8% है। डॉ. सोमचाई के अनुसार, E20 अपनाने से एथेनॉल की मांग 35 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़कर 64 लाख लीटर प्रतिदिन हो जाएगी। इससे देश के भीतर ही अरबों बाट का आर्थिक लाभ रहेगा, जिससे 4.2 लाख किसान परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा और गन्ने के दाम स्थिर रहेंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि, ब्राजील लंबे समय से E27 को न्यूनतम मानक के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, जबकि भारत भी तेजी से E20 लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।
ईंधन के अलावा, उद्योग गन्ने की पत्तियों की “बाय-बैक” व्यवस्था को भी बढ़ावा दे रहा है, जिससे बायोमास ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इस पहल से किसानों को हर साल करीब 1.2 अरब बाट की अतिरिक्त आय हो रही है और खुले में फसल अवशेष जलाने जैसी समस्याओं को रोकने में मदद मिल रही है, जो PM 2.5 प्रदूषण का एक बड़ा कारण है।


















