नई दिल्ली : भारत में चीनी उत्पादन बढ़कर 262.14 लाख टन हो गया है, जो पिछले साल मार्च मध्य के 237.24 लाख टन के मुकाबले करीब 10.5% अधिक है। यह जानकारी इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के आंकड़ों में सामने आई है। फिलहाल देशभर में 157 चीनी मिलें चालू हैं, जबकि पिछले साल इसी समय 182 मिलें संचालित थीं। देश के प्रमुख उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में अब तक 81.3 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ है, जो पिछले साल के 81.2 लाख टन के लगभग बराबर है। यहां इस समय 78 मिलें चल रही हैं, जबकि पिछले साल इसी तारीख पर 83 मिलें चालू थीं।
महाराष्ट्र में उत्पादन 98.46 लाख टन और कर्नाटक में 46.04 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में क्रमशः 78.70 लाख टन और 39.15 लाख टन था। इन दोनों राज्यों में फिलहाल 26 मिलें चालू हैं, जबकि पिछले सीजन में इसी समय 27 मिलें संचालित थीं। विशेष रूप से दक्षिण कर्नाटक की कुछ मिलें जून/जुलाई से सितंबर 2026 के विशेष सीजन में फिर से शुरू होने की संभावना है।
जैसे-जैसे चीनी सीजन अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, उद्योग को न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में जल्द बढ़ोतरी की उम्मीद है। ISMA के अनुसार, उत्पादन लागत बढ़ने और मिलों को मिलने वाली कीमत कम रहने से नकदी प्रवाह पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे गन्ना किसानों के भुगतान में बकाया भी बढ़ रहा है। महाराष्ट्र में फरवरी 2026 तक बकाया राशि 4,898 करोड़ रुपये पहुंच गई है, जो पिछले साल इसी समय 2,949 करोड़ रुपये थी।
उद्योग का कहना है कि, मौजूदा लागत के अनुसार MSP में समय पर संशोधन जरूरी है, ताकि मिलों की स्थिति सुधरे, किसानों को भुगतान तेज हो और बाजार में स्थिरता बनी रहे, बिना सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाले। ISMA ने यह भी कहा है कि, अतिरिक्त चीनी भंडार और गिरती कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार को चीनी के MSP और एथेनॉल की खरीद कीमतों में संशोधन करना चाहिए, ताकि किसानों और मिलों दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।


















