बेलगावी : कर्नाटक राज्य रैथा संघ (केआरआरएस) ने कहा है कि, राज्य सरकार उन चीनी मिलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है, जिन्होंने गन्ना किसानों का बड़ा बकाया रोक रखा है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि, यदि राज्य सरकार दो सप्ताह की निर्धारित अवधि के भीतर सभी बकाया भुगतान सुनिश्चित नहीं करती, तो वे राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। राज्य सरकार को सौंपे गए ज्ञापन में केआरआरएस नेता चुनप्पा पुजारी ने कहा कि, बेलगावी जिले की 28 में से आठ चीनी मिलों पर किसानों का ₹1,554 करोड़ बकाया है।
उन्होंने कहा, मैं राज्य सरकार को गुरलापुर क्रॉस पर लाभकारी मूल्य की मांग को लेकर हुए 11 दिन के आंदोलन की याद दिलाना चाहता हूं। किसानों ने सरकार को अपनी शर्तें मानने पर मजबूर किया था। हमने आंदोलन केवल इस शर्त पर स्थगित किया था कि किसानों को उचित मूल्य मिलेगा। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो हम फिर से आंदोलन शुरू करेंगे।
इस बीच, विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा विधायक आर. अशोक ने राज्य सरकार पर किसानों के हितों की रक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, कांग्रेस सरकार बकाया भुगतान के 15 दिन के नियम को लागू करने की इच्छा नहीं दिखा रही है। ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री किसानों के हितों की रक्षा करने के बजाय अपनी कुर्सी बचाने में व्यस्त हैं। किसानों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। इससे यह संदेह पैदा होता है कि कांग्रेस सरकार जीवित है या नहीं। मुख्यमंत्री को मिलों को सभी बकाया चुकाने का निर्देश देना चाहिए।
पुजारी ने ‘द हिंदू’ से कहा कि, पूरे राज्य में मिलों ने बकाया रोक रखा है।उन्होंने कहा, राज्य की 90 मिलों में से 76 चालू हैं, जिनमें बेलगावी की 28, बागलकोट की 12 और विजयपुरा की 9 मिलें शामिल हैं। कुल मिलाकर इन पर ₹4,400 करोड़ से अधिक का बकाया है, जिसमें से लगभग 30% केवल बेलगावी जिले में है।इसी कारण हम बेलगावी से शुरुआत कर रहे हैं। हम सभी जिलों में जाएंगे और सुनिश्चित करेंगे कि हर किसान को न्याय मिले।
उन्होंने आगे कहा, हमारा आंदोलन केवल गन्ने तक सीमित नहीं है। हम चाहते हैं कि सभी फसलों के किसानों को उचित और लाभकारी मूल्य मिले।हमने राज्य सरकार को गरीबों के लिए इंदिरा फूड किट योजना की घोषणा का स्वागत करते हुए पत्र भी लिखा है। उन्होंने कहा, हमने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से आग्रह किया है कि इस योजना के तहत वितरित होने वाले सभी खाद्यान्न सीधे किसानों से खरीदे जाएं। यदि राज्य सरकार रैथा संपर्क केंद्रों के माध्यम से बीज और उर्वरक बेच सकती है, तो वहीं से किसानों की उपज भी खरीद सकती है।


















