इस्लामाबाद : घरेलू आपूर्ति और स्टॉक की उपलब्धता को लेकर चिंताओं के कारण केंद्र सरकार ने चालू विपणन वर्ष में चीनी के निर्यात की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है। रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं अनुसंधान मंत्रालय ने संकेत दिया है कि, निर्यात के लिए कोई अतिरिक्त अधिशेष उपलब्ध नहीं है, जबकि उद्योग ने लगभग 10 लाख टन चीनी निर्यात करने का प्रस्ताव दिया था। यह रुख तब सामने आया है, जब अधिकारी वर्ष के शेष समय के लिए आपूर्ति आवश्यकताओं का आकलन कर रहे हैं।
उद्योग के अनुमान के मुताबिक, मार्च के मध्य तक उत्पादन 7.21 मिलियन टन रहा है और सीजन के अंत तक इसके 7.5 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है। इसके आधार पर मिल मालिकों का कहना है कि, निर्यात के लिए अधिशेष उपलब्ध है। हालांकि, आधिकारिक स्टॉक के आंकड़े अलग स्थिति दर्शाते हैं। मार्च के मध्य तक कुल भौतिक चीनी भंडार लगभग 5.002 मिलियन टन था, जबकि वार्षिक घरेलू मांग लगभग 6.5 मिलियन टन आंकी गई है।
औसत मासिक खपत 0.541 मिलियन टन होने के कारण, मार्च से नवंबर तक मांग पूरी करने के लिए देश को लगभग 4.33 मिलियन टन चीनी की आवश्यकता होगी।जब इसमें 0.7 मिलियन टन का रणनीतिक भंडार और आपूर्ति श्रृंखला के लिए अतिरिक्त 0.3 मिलियन टन जोड़ा जाता है, तो कुल आवश्यक भंडार लगभग 5.33 मिलियन टन हो जाता है। इससे 0.33 मिलियन टन से अधिक की संभावित कमी का संकेत मिलता है, जिससे आपूर्ति की स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि यह अंतर निर्यात योग्य अधिशेष के दावों पर सवाल खड़ा करता है।


















