जमैका : जीके समूह ने शुगर टैक्स की बजाय उत्पाद सुधार को बेहतर विकल्प बताया

किंग्स्टन : स्थानीय निर्माता हाल ही में लागू किए गए विशेष उपभोग कर (SCT) का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं, जो गैर-मादक पेय और मीठे पेयों पर लगाया गया है।इसी बीच, खाद्य और वित्तीय समूह ग्रेसकेनेडी लिमिटेड के अनुसार उत्पाद सुधार (reformulation) को प्रोत्साहित करना स्वास्थ्यकर उपभोग आदतों को बढ़ावा देने का अधिक प्रभावी तरीका होगा, बजाय इसके कि केवल करों पर निर्भर रहा जाए।

ग्रेसकेनेडी लिमिटेड ग्रुप के सीईओ फ्रैंक जेम्स ने कहा कि जबकि ग्रेसकेनेडी, जिसका संचालन मुख्य रूप से खाद्य और पेय क्षेत्र में है, नए कर उपाय के खिलाफ नहीं है। उन्हें लगता है कि, ऐसे नीतिगत कदम जो निर्माताओं को पेयों में शुगर कम करने के लिए प्रोत्साहित करें, दीर्घकालीन स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने निवेशकों को संबोधित करते हुए कहा, हम सरकार के स्वास्थ्य अभियान के प्रति सजग हैं, लेकिन हम इसे पहले से ही कर रहे हैं। हम निश्चित रूप से यह चाहेंगे कि SCT इस तरह से संरचित हो कि यह उत्पाद सुधार को बढ़ावा दे—निर्माताओं को उनके उत्पादों में शुगर की मात्रा कम करने के लिए प्रोत्साहित करे।

जेम्स ने कहा कि, शताब्दी से अधिक पुराने इस व्यवसाय ने हमेशा ही अपने ग्राहकों के लिए स्वास्थ्यकर विकल्प प्रदान करने की दिशा में काम किया है। उन्होंने बताया कि SCT लागू होने से पहले ही जीके शुगर कंटेंट कम करने के उपाय तलाश रहा था, साथ ही स्वाद और गुणवत्ता बनाए रखने का प्रयास कर रहा था।उन्होंने कहा, यह केवल पेयों तक सीमित नहीं है, बल्कि समूह के कई अन्य उत्पादों में भी हमने ‘बेहतर-आपके लिए’ विकल्प पेश किए हैं, ताकि हमारे उपभोक्ताओं के पास विकल्प मौजूद हों। सरकार के नवीनतम कर उपाय का स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है, जबकि कुछ निर्माताओं ने इसके प्रभावकारिता पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि, यह कर असमान रूप से पेय क्षेत्र को लक्षित करता है और कम आय वाले उपभोक्ताओं पर अधिक प्रभाव डाल सकता है।

वित्तीय मामले पर विपक्ष के प्रवक्ता जूलियन रॉबिन्सन ने संसद में बजट चर्चा के दौरान कहा कि उत्पाद सुधार पर ध्यान केंद्रित करना कर लगाने से अधिक प्रभावी दृष्टिकोण है। शुगर या स्वीटनर वाले पेयों पर प्रति मिलीलीटर $0.02 का फ्लैट-रेट कर लगभग $10.1 बिलियन राजस्व जुटाने की उम्मीद है। यह कर स्थानीय और आयातित दोनों प्रकार के पेयों पर लागू होगा।स्वास्थ्य उपाय के रूप में पेश किए गए इस कर का लक्ष्य सोडा, फलों के फ्लेवर्ड पेय और अन्य गैर-मादक पेय हैं, जिनमें अतिरिक्त शुगर, कैलोरी या नॉन-न्यूट्रिटिव स्वीटनर शामिल हैं, चाहे वे कार्बोनेटेड हों या नॉन-कार्बोनेटेड। नीति का उद्देश्य मीठे पेयों की खपत को कम करना है, जो अक्सर मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों से जुड़ी होती है।यह कर 1 मई 2026 से लागू होने वाला है।

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