लोकसभा ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अवधि मानसून सत्र तक बढ़ाई

नई दिल्ली: लोकसभा ने बुधवार को ‘वन नेशन, वन इलेक्शन बिल’ पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय-सीमा बढ़ा दी। अब समिति अपनी रिपोर्ट 2026 के मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक पेश कर सकेगी।यह प्रस्ताव ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पैनल के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने पेश किया। उन्होंने सदन से अनुरोध किया कि, संविधान (एक सौ उनतीसवां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए जेपीसी को अधिक समय दिया जाए। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि इन विधेयकों पर संयुक्त समिति की रिपोर्ट पेश करने की समय-सीमा 2026 के मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक बढ़ाई जाए।

यह विधेयक दिसंबर 2024 में लोकसभा में पेश किया गया था और आगे की जांच के लिए दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेजा गया था। संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 उस प्रस्तावित सुधार से जुड़ा है, जिसे आमतौर पर “वन नेशन, वन इलेक्शन” कहा जाता है। इसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराना है। वहीं, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 भी इसी व्यापक ढांचे का हिस्सा है, जिसका मकसद देशभर में एक साथ चुनाव कराने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

वर्तमान में जेपीसी इन दोनों विधेयकों की समीक्षा कर रही है। ये विधेयक 17 दिसंबर 2024 को लोकसभा में पेश किए गए थे और विस्तृत जांच के लिए समिति को भेजे गए थे। इनका उद्देश्य देश में एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था लागू करना है। इससे पहले, 9 मार्च को नई दिल्ली के संसद भवन एनेक्सी में जेपीसी की बैठक हुई थी। बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने कहा कि “वन नेशन, वन इलेक्शन” राष्ट्रीय हित में है, किसी राजनीतिक दल के हित में नहीं।

एएनआई से बातचीत में चौधरी ने कहा कि हमें दलगत हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से एक ही मतदाता सूची बन सकेगी, जिससे काफी समय की बचत होगी। उन्होंने यह भी बताया कि गुलाम नबी आजाद ने अपने व्यापक राजनीतिक अनुभव साझा किए और समिति के सदस्यों की शंकाओं का समाधान किया। निष्कर्ष यह निकला कि “वन नेशन, वन इलेक्शन” राजनीतिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित में है।बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने समिति के साथ संवाद किया। (एएनआई)

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