पुणे : इस सीजन में गन्ने की कमी के कारण समय से पहले पेराई बंद होने और आने वाले खरीफ मौसम में सूखे जैसी स्थिति की आशंका के चलते महाराष्ट्र के चीनी उद्योग की समस्याएं और बढ़ सकती हैं। द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के मुताबिक, एक अधिकारी ने कहा, यदि एल नीनो के कारण महाराष्ट्र में सूखा पड़ता है, तो सरकार को गन्ने की खेती को हतोत्साहित करने का निर्णय लेना पड़ सकता है, क्योंकि यह अत्यधिक पानी खपत वाली फसल है। इसके बजाय कृषि अनुसंधान विश्वविद्यालयों की मदद से किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सूखे की स्थिति में कम पानी वाली फसलें जैसे मोटे अनाज (मिलेट्स) और दालों पर जोर दिया जाएगा।
खबर में आगे कहा गया है की, राज्य कृषि विभाग को विशेष रूप से विदर्भ और मराठवाड़ा के 14 संकटग्रस्त जिलों में सूखे से निपटने के लिए अग्रिम प्री-मानसून योजना शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। चालू सीजन में कुल 202 चीनी मिलों में से 85 प्रतिशत से अधिक मिलों ने गन्ने की कमी के कारण पेराई कार्य बंद कर दिया है। केवल 28 मिलों में ही पेराई जारी है। महाराष्ट्र के चीनी आयुक्त की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कम से कम 172 चीनी मिलों ने पेराई पूरी कर ली है। इनमें सोलापुर की 45, कोल्हापुर की 40, पुणे की 24, नांदेड़ की 24, छत्रपति संभाजीनगर की 18, अहिल्यानगर की 20 और अमरावती क्षेत्र की 1 मिल शामिल है।” जबकि पिछले सीजन में इसी अवधि तक 103 मिलों ने पेराई समाप्त की थी।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 18 मार्च तक राज्य की मिलों ने 837.31 लाख टन गन्ने की पेराई की, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1,029.98 लाख टन थी। चीनी रिकवरी दर 9.45% रही, जो पिछले साल के 10.16% से कम है।कम पेराई का एक कारण बेमौसम बारिश का गन्ने की खेती पर प्रतिकूल प्रभाव भी बताया गया है, जिससे उत्पादन और मिलों को आपूर्ति प्रभावित हुई है। चीनी मिलर्स ने केंद्र और राज्य सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने की लंबे समय से लंबित मांग पर ध्यान देने की अपील की है।विपक्षी विधायकों ने भी राज्य सरकार से इस मुद्दे पर ध्यान देने की मांग की है और यह विषय विधानसभा के बजट सत्र में भी उठा।


















