नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने स्पॉट आधार पर अतिरिक्त 7.31 एमएमएससीएमडी (मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन) गैस की व्यवस्था की है। इसके चलते यूरिया प्लांट्स को मिलने वाली कुल गैस आपूर्ति 32 एमएमएससीएमडी से बढ़कर 39.31 एमएमएससीएमडी हो गई है। घरेलू यूरिया उत्पादन भी करीब 23% बढ़ने का अनुमान है, जो 54,500 मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़कर 67,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन हो सकता है। इससे प्लांट्स की गैस जरूरतों की पूर्ति अब उनकी औसत आवश्यकता के 76% तक पहुंच गई है, जो पहले 62% थी।
वर्तमान में कुल यूरिया भंडार 61.14 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) है, जो मार्च 2025 के 55.22 एलएमटी से अधिक है।खास बात यह है कि, डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) का स्टॉक दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर 24.24 एलएमटी हो गया है, जिससे आगामी बुवाई सीजन के लिए मजबूत तैयारी सुनिश्चित हुई है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, खासकर खरीफ 2026 के लिए उर्वरक की स्थिति को लेकर हमारे पास पर्याप्त भंडार है और हम सहज स्थिति में हैं। उर्वरक विभाग ने वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पहले ही वैश्विक निविदाएं जारी कर दी थीं, जिन्हें अच्छा प्रतिसाद मिला है।हमें उम्मीद है कि विभिन्न स्रोतों से मंगाई गई अधिकांश आपूर्ति मार्च के अंत तक पहुंच जाएगी।उन्होंने यह भी कहा कि, उर्वरक आयात के लिए सरकार ने विविध स्रोतों पर आधारित रणनीति अपनाई है और इस संबंध में कई देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।

















