बीड: जिले का बकाया गन्ना भुगतान का मुद्दा सुलझाने के लिए जिल्हाधिकारी कार्यालय में शुक्रवार को बैठक हुई।इस बैठक को संबोधित करते हुए जिल्हाधिकारी विवेक जॉन्सन ने कहा की, गन्ना नियंत्रण अधिनियम 1966 के अनुसार, पेराई किए गए गन्ने की एफआरपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) राशि 14 दिनों के भीतर किसानों के बैंक खातों में जमा करना अनिवार्य है। उन्होंने भुगतान मामले में लापरवाही करने वाले मिलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।
बैठक में अब तक मिलों द्वारा की गई कुल पेराई, किसानों को भुगतान की गई एफआरपी राशि और बकाया भुगतान, बंद चीनी मिलें और उनके अंतिम भुगतान, और गुड़ पाउडर कारखानों के ऋण जैसे मुख्य विषयों पर चर्चा की गई।कलेक्टर ने बैठक में स्पष्ट किया कि, गन्ने की आपूर्ति के बाद निर्धारित समय के भीतर पैसा प्राप्त करना किसानों का अधिकार है। कई मिलों से भुगतान में हो रही देरी की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।
इस बैठक में निवासी उपजिल्हाधिकारी शिवकुमार स्वामी, प्रादेशिक उपसंचालक (साखर) के प्रतिनिधि साहेबराव जेधे, विशेष लेखा परीक्षक एस. एस. सुपेकर के साथ-साथ जिल्ह्यातील सभी साखर मिलों के प्रबंधक और प्रतिनिधि उपस्थित थे।किसानों को आर्थिक तंगी से बचाने के लिए कलेक्टर ने सभी मिलर्स को अप्रैल के अंतिम सप्ताह से पहले किसानों का बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया है। इस निर्देश का आकलन करने के लिए अप्रैल के अंत में एक विशेष बैठक बुलाई जाएगी और तब तक सभी मिलों को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।


















