राज्य में गन्ना मज़दूरों की भलाई के लिए सर्वसमावेशी कानून ज़रूरी: डिप्टी स्पीकर डॉ. नीलम गोरहे

मुंबई (महाराष्ट्र): विधान परिषद डिप्टी स्पीकर डॉ. नीलम गोरहे ने कहा कि, राज्य में गन्ना मज़दूरों की सेहत, आर्थिक और सामाजिक हालत सुधारने के लिए एक सर्वसमावेशी कानून बनाना ज़रूरी है। उन्होंने DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) सिस्टम के ज़रिए तुरंत मदद देने का भी निर्देश दिया, ताकि मज़दूरों को ज़रूरी सामान समय पर मिल सके। ‘लोकमत’ में छपी खबर के मुताबिक, डॉ. गोरहे की अध्यक्षता में विधान भवन में गन्ना मज़दूरों को दी जाने वाली सुविधाओं का रिव्यू करने के लिए एक मीटिंग हुई। इस मीटिंग में कोऑपरेटिव डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी प्रवीण दराडे, शुगर कमिश्नर संजय कोलते, डॉ. आशीष भारती, डिप्टी डायरेक्टर, फैमिली वेलफेयर, पुणे और संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

डॉ. नीलम गोरहे ने कहा कि, गन्ना मज़दूरों को गमबूट, इलेक्ट्रिक हार्वेस्टर, ग्लव्स और महिला मज़दूरों के लिए सैनिटरी नैपकिन जैसी ज़रूरी चीज़ें समय पर मिल सकें, इसके लिए DBT के ज़रिए फ़ाइनेंशियल मदद देना आसान होगा। इसके अलावा, उन्होंने गन्ना मज़दूरों के लिए मौजूद मोबाइल टॉयलेट की संख्या बढ़ाने की ज़रूरत बताई। उन्होंने निर्देश दिया कि, काम की जगह पर हफ़्ते में एक बार मोबाइल क्लिनिक जाए और महिला मज़दूरों के लिए गायनेकोलॉजिस्ट की सर्विस दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित एजेंसियों को महिला गन्ना मज़दूरों को मैटरनिटी लीव और मैटरनिटी बेनिफिट देने के बारे में पॉज़िटिव सोचना चाहिए।

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