बक्सर: भारत प्लस एथेनॉल प्लांट के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) अजय सिंह ने मंगलवार को कन्फर्म किया कि, यूनिट बुधवार से बंद हो जाएगी, जिससे कम से कम 700 मजदूरों के परिवार अब नौकरी जाने की चिंता में हैं। ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ के साथ बोलते हुए, प्लांट के एक एम्प्लॉई प्रदीप सिंह ने कहा की, मैं लगभग 20 साल गुजरात में रहा।जब मुझे बिहार में नौकरी मिली तो मैं खुश था। अब मेरा परिवार कैसे गुजारा करेगा?”उन्होंने कहा कि अगर यूनिट बंद हो जाती है, तो उन्हें काम की तलाश में गुजरात या मुंबई लौटना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “जब प्लांट बंद है तो CMD हमें कब तक पेमेंट करते रहेंगे?”
बक्सर जिले के नवानगर इंडस्ट्रियल एरिया में 200 करोड़ रुपये की लागत से बना यह प्लांट तेल कंपनियों द्वारा एथेनॉल लिफ्टिंग कम करने की वजह से प्रभावित हो रहा है। यह संकट सरकार की नई एथेनॉल टेंडर पॉलिसी के बाद पैदा हुआ है। CMD ने कहा, एथेनॉल के ऑर्डर तेज़ी से कम हो गए हैं, जिससे प्लांट को सिर्फ़ 50% कैपेसिटी पर काम करना पड़ रहा है। स्टोरेज टैंक दो दिनों में भरने की उम्मीद है, इसलिए शटडाउन होना ज़रूरी है। अगर प्लांट बंद होता है, तो लगभग 700 वर्कर और कर्मचारी सीधे तौर पर प्रभावित होंगे, जबकि किसानों और ट्रांसपोर्ट वर्कर समेत लगभग 2,000 लोग अपनी रोज़ी-रोटी के लिए प्लांट पर निर्भर हैं।
आरा के रहने वाले सुजीत कुमार सिंह ने कहा कि, वह पहले मध्य प्रदेश में काम करते थे। उन्होंने कहा, जब बिहार में यह प्लांट शुरू हुआ, तो मुझे घर के पास नौकरी मिलने की खुशी थी। मैं अपने परिवार के साथ समय बिता सकता था। अब, यह नौकरी खत्म हो सकती है, और मुझे फिर से बाहर जाना पड़ेगा। वर्करों ने मांग की है कि, सरकार प्लांट का एथेनॉल प्रोडक्शन पूरी तरह से शुरू करें ताकि वे बिहार में काम करते रह सकें।
‘टीओआई’ से बोलते हुए बिहार एथेनॉल एसोसिएशन के सेक्रेटरी कुणाल किशोर के मुताबिक, देश में एथेनॉल खरीदने वाली सिर्फ़ इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम यही तेल कंपनियां हैं। उन्होंने कहा कि, एथेनॉल या तो लंबे समय के ऑफटेक एग्रीमेंट वाले प्लांट से खरीदा जाता है या अगर डिमांड पूरी नहीं हो पाती है तो दूसरे प्लांट से खरीदा जाता है। उन्होंने कहा, पहले यह भरोसा दिलाया गया था कि अगर ज्यादा डिमांड हुई तो एग्रीमेंट वाले प्लांट को प्रायोरिटी दी जाएगी।अब ऐसा लगता है कि उस भरोसे का उल्लंघन किया गया है।
किशोर ने आगे कहा, बिहार के एथेनॉल प्लांट्स के लिए अस्तित्व का संकट है। राज्य और केंद्र के कहने पर कैपेसिटी बनाने के बावजूद, OMCs से कम ऑफ़ टेक ऑर्डर मिलने की वजह से आज कई डेडिकेटेड प्लांट्स को बंद करने की तरफ धकेला जा रहा है। इससे न सिर्फ़ हज़ारों नौकरियों को खतरा है, बल्कि बिहार के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम में इन्वेस्टर्स के भरोसे को भी बहुत नुकसान पहुँच रहा है। कैपिटल सिंगल-प्रोडक्ट एथेनॉल फैसिलिटीज़ में फंसा हुआ है, और कमाई का कोई दूसरा ज़रिया नहीं है।खबर के अनुसार, ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ ने जब भारत पेट्रोलियम के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुराग सरावगी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कमेंट करने से मना कर दिया।
















