2030 तक देश की अर्थव्यस्था में बायोएनर्जी का 1.6 लाख करोड़ का योगदान संभव : मंत्री नितिन गडकरी

पुणे : केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा की, 2030 तक देश की अर्थव्यस्था में बायोएनर्जी का 1.6 लाख करोड़ का योगदान और 10 लाख रोजगार निर्माण होने की संभावना है। मंत्री नितिन गडकरी, “Compressed Biogas Conclave 2026 : Moving Towards an Efficient & Robust CBG Product on Ecosystem” के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस अवसर पर IFGE के अध्यक्ष और प्राज इंडस्ट्रीज के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. प्रमोद चौधरी और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

यह कॉन्क्लेव इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी (IFGE) द्वारा आज, 6 और 7 मार्च 2026 को पुणे के यशदा में आयोजित किया गया है। इस पहल को भारत सरकार के न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय का सपोर्ट है। 8 मार्च 2026 को CBG फैसिलिटीज़ का एक ऑप्शनल टेक्निकल साइट विज़िट भी है। मंत्री गडकरी ने कहा, आज भारत के सामने दो बड़ी चुनौतियाँ हैं, एक है प्रदूषण को कम करना और दूसरी है पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करना।भारत हर साल 86 प्रतिशत पेट्रोलियम आयात करता है, जिससे देश पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हम वैकल्पिक ईंधनों की ओर बढ़ें, जैसे कि बायोफ्यूल, एथेनॉल, बायोडीजल और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG)।

भारत में कंप्रेस्ड बायोगैस के लिए बहुत बड़ा अवसर है, क्योंकि हमारे पास कृषि अवशेष, बायोमास, नगर निगम का कचरा और अन्य जैविक कचरा बड़ी मात्रा में उपलब्ध है, जिसे ऊर्जा में बदला जा सकता है। कंप्रेस्ड बायोगैस के कई लाभ हैं, यह प्रदूषण को कम करती है, कृषि कचरे को ऊर्जा में बदलती है, किसानों की आय बढ़ाने में मदद करती है, और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करती है। किसानों को कृषि अवशेष को समस्या के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे ऊर्जा उत्पादन के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में देखना चाहिए। सरकार ने इस दिशा में कई पहल की हैं, जैसे कि SATAT योजना, जिसका उद्देश्य कंप्रेस्ड बायोगैस के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देना है।आने वाले वर्षों में भारत बायोफ्यूल और बायोगैस उत्पादन में दुनिया के अग्रणी देशों में से एक बनेगा।

बायो-एनर्जी क्षेत्र ग्रामीण भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे गाँवों में नए उद्योग स्थापित होंगे, रोजगार बढ़ेगा और साथ ही पर्यावरण की भी रक्षा होगी। इस क्षेत्र में नई तकनीक और नवाचार बहुत महत्वपूर्ण होंगे, जिससे:संयंत्रों की दक्षता बढ़ेगी, कच्चे माल का बेहतर उपयोग होगा, उत्पादन लागत कम होगी और परियोजनाएँ आर्थिक रूप से अधिक व्यवहारिक बनेंगी। उन्होंने उद्यमियों और निवेशकों से इस क्षेत्र में निवेश करने की अपील की। उन्होंने कहा, सरकार इस क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक सहयोग और अनुकूल नीतियाँ प्रदान करेगी।भारत के पास प्रतिभा, संसाधन और तकनीक है। हम मिलकर भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और सतत ऊर्जा का वैश्विक नेता बना सकते हैं।

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