मुंबई : सोमवार को भारतीय चीनी और एथेनॉल से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखी गई, जबकि व्यापक शेयर बाजार का रुझान कमजोर रहा। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से एथेनॉल की मांग बढ़ने की उम्मीद ने इन शेयरों को मजबूती दी। ट्रेडिंग के दौरान कई चीनी कंपनियों के शेयर 3% से 10% तक चढ़ गए। दोपहर करीब 2 बजे तक द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज के शेयर लगभग 8.5% की बढ़त के साथ सबसे आगे रहे। अन्य प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में डालमिया भारत शुगर एंड इंडस्ट्रीज लगभग 7.7%, और धामपुर शुगर मिल्स करीब 7.5% ऊपर रहे। इसके अलावा बजाज हिंदुस्तान शुगर के शेयर 6.8% और उत्तम शुगर मिल्स करीब 6.2% तक चढ़े।
दूसरी कंपनियों में प्राज इंडस्ट्रीज के शेयर लगभग 6%, श्री रेनुका शुगर्स 4.8%, और बलरामपुर चीनी मिल्स करीब 3.5% तक बढ़त में रहे। यह तेजी पश्चिम एशिया में अमेरिका-इज़राइल-ईरान से जुड़े बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बाद आई।9 मार्च को ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी कुछ समय के लिए 119.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
आमतौर पर जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो एथेनॉल उत्पादन अधिक लाभदायक हो जाता है।ऐसे में चीनी मिलें चीनी उत्पादन की बजाय गन्ने का ज्यादा हिस्सा बायोफ्यूल यानी एथेनॉल बनाने में लगाने लगती हैं। इससे इस क्षेत्र की कंपनियों की मुनाफे की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। भारत सरकार भी अपने ईंधन मिश्रण कार्यक्रम (फ्यूल ब्लेंडिंग प्रोग्राम) के तहत एथेनॉल उत्पादन को लगातार बढ़ा रही है, जिसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और कार्बन उत्सर्जन घटाना है। इस नीति के तहत तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल बेचने से पहले उसमें एथेनॉल मिलाना अनिवार्य है। यह कार्यक्रम किसानों को भी लाभ पहुंचाता है, क्योंकि इससे गन्ना और मक्का जैसी फसलों की मांग बढ़ती है और देश के बायोफ्यूल क्षेत्र को मजबूती मिलती है।

















