मुंबई: महाराष्ट्र के पूर्व वित्त एवं सहकारिता मंत्री दिलीप वलसे-पाटिल ने मंगलवार को राज्य सरकार और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर महाराष्ट्र के सहकारी चीनी उद्योग को तत्काल सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा, राज्य का चीनी उद्योग इस समय गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है। राज्य विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान एनसीपी विधायक वलसे-पाटिल ने कहा कि, प्रतिकूल मौसम के कारण इस वर्ष राज्य में गन्ना उत्पादन में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट आई है।इसके चलते चीनी मिलों का पेराई सीजन 100 दिनों से भी कम समय में समाप्त हो गया।
उन्होंने बताया कि, सीजन के समय से पहले खत्म होने से चीनी उद्योग को लगभग 3,300 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान हुआ है, जबकि किसानों को मिलने वाली फेयर एंड रेम्यूनरेटिव प्राइस (FRP) की तक़रीबन 5000 करोड़ रुपये की राशि अभी भी बकाया है। वलसे-पाटिल ने चेतावनी दी कि, यदि राज्य सरकार मिलों को पुनरुद्धार (रिवाइवल) पैकेज नहीं देती, तो ग्रामीण महाराष्ट्र की रीढ़ माने जाने वाला सहकारी चीनी उद्योग अगले दो वर्षों में ढह सकता है। उन्होंने कहा कि, चीनी उद्योग केवल फैक्ट्रियों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण आर्थिक इंजन है।
उन्होंने बताया कि, जीएसटी, सेस और बिजली शुल्क जैसे विभिन्न करों के माध्यम से यह उद्योग केंद्र और राज्य सरकारों को हर साल लगभग 8,000 करोड़ रुपये का राजस्व देता है। इस उद्योग का वार्षिक कारोबार 50,000 से 60,000 करोड़ रुपये के बीच है।वलसे-पाटिल ने कहा, चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) वास्तविक उत्पादन लागत से कम होने के कारण मिलों को भारी नुकसान हो रहा है। यदि ये मिलें बंद हो गईं, तो इसका सीधा असर राज्य के जीएसटी कलेक्शन पर पड़ेगा। इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में एथेनॉल उत्पादन पर लगाए गए प्रतिबंधों से मिलों की एक वैकल्पिक आय का स्रोत भी बंद हो गया है।
उन्होंने चीनी के एमएसपी में तत्काल बढ़ोतरी, एथेनॉल उत्पादन को फिर से प्रोत्साहन देने और केंद्र द्वारा तय चीनी निर्यात कोटा बढ़ाने की मांग की।उन्होंने याद दिलाया कि, केंद्र सरकार ने 2002–03 के चीनी सीजन में किसानों के बकाया भुगतान के लिए सॉफ्ट लोन योजना शुरू की थी। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाए, ताकि धन जुटाकर गन्ना बकाया का भुगतान समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से किया जा सके।वलसे-पाटिल ने कहा, चीनी मिलें ग्रामीण महाराष्ट्र की रीढ़ हैं। यदि यह रीढ़ टूट गई, तो पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। इसलिए ‘किसानों को बचाओ और चीनी उद्योग को सुरक्षित रखो’ आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।


















