नई दिल्ली : एक उभरता हुआ एल नीनो प्रभाव, पश्चिम एशिया के युद्ध से पैदा हुई आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं के साथ मिलकर, फसलों पर दबाव बढ़ा सकता है। इससे कृषि उत्पादन और उपज में गिरावट आ सकती है, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर कीमतें बढ़ सकती हैं। द हिंदू बिजनेसलाइन में प्रकाशित खबर के अनुसार, अमेरिका स्थित शोधकर्ता और विश्लेषक माइकल फेरारी के अनुसार इसका असर खास तौर पर चीनी, पाम ऑयल, गेहूं और कॉफी जैसी फसलों पर अधिक दिखाई दे सकता है।
माइकल फेरारी, मोबी (Moby) में रिसर्च के उपाध्यक्ष और अल्फाजियो (AlphaGeo) में सीनियर पार्टनर हैं। मोबी दुनिया भर के खुदरा निवेशकों को तकनीक आधारित निवेश अनुसंधान उपलब्ध कराता है, जबकि अल्फाजियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जियोस्पेशियल विश्लेषण के जरिए निवेशकों को जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक बदलावों के जोखिम का आकलन करने में मदद करता है।
उत्पादकों को अधिक मुनाफा, कंपनियों पर दबाव…
फेरारी के मुताबिक इस तरह के संयुक्त जोखिम से उत्पादकों के लिए ऑपरेटिंग मार्जिन बढ़ सकता है, लेकिन इससे उन कंपनियों पर दबाव पड़ेगा जो कच्चे माल के रूप में इन कृषि वस्तुओं को खरीदती हैं। उन्होंने कहा कि, मौजूदा समय में तेल और पेट्रोल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, ऐसे में चीनी आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक कमोडिटी बन सकती है।
महंगा हो सकता है एथेनॉल…
गन्ने से बनने वाला एथेनॉल तेल की कीमतें बढ़ने पर अधिक कीमत पर बिक सकता है, क्योंकि बाजार में इसके विकल्प के रूप में इसकी मांग बढ़ जाती है। यदि चीनी की भौतिक आपूर्ति कम रहती है, तो यह कीमतों को और अधिक बढ़ाने का कारण बन सकता है। इसलिए भविष्य में चीनी के भंडार और आपूर्ति पर नजर रखना भी बेहद जरूरी होगा।फेरारी का कहना है कि, यदि इस वर्ष एल नीनो काफी मजबूत रहता है, तो यह वैश्विक चीनी कीमतों को बढ़ाने वाला एक बड़ा कारक बन सकता है।
2026-27 में मजबूत एल नीनो की संभावना…
अमेरिका की कई एजेंसियां, जापानी मौसम पूर्वानुमानकर्ता और यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट (ECMWF) भी 2026-27 के लिए मजबूत एल नीनो की संभावना जता रहे हैं। हालांकि यह कहना मुश्किल है कि “सुपर एल नीनो” आएगा या नहीं, लेकिन कई संकेत मजबूत एल नीनो की ओर इशारा कर रहे हैं।
मौसम संकेतों पर नजर…
ECMWF के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत संभावना है कि मौसम का पैटर्न मजबूत एल नीनो को ट्रिगर कर सकता है। अमेरिका की क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर (NOAA) और इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसी एजेंसियों ने भी इसी तरह के पूर्वानुमान जारी किए हैं।
भारत में गर्म और शुष्क मौसम की संभावना…
एल नीनो के शुरुआती प्रभाव 2026 की दूसरी छमाही में दिख सकते हैं और 2027 तक जारी रह सकते हैं।सितंबर तक इसके असर से भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्वी ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील के कुछ हिस्सों में अधिक गर्मी का दबाव बढ़ सकता है।इसके बाद अक्टूबर से जनवरी के बीच ब्राजील और अर्जेंटीना में मौसम गर्म और ज्यादा बारिश वाला हो सकता है, जबकि भारत में गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क मौसम रहने की संभावना है।फेरारी ने कहा कि, अटलांटिक और प्रशांत महासागर में तूफान (हैरिकेन) के मौसम को लेकर अप्रैल के बाद बेहतर आकलन किया जा सकेगा।उन्होंने बताया कि एल नीनो और ला नीना के संकेत तूफानों की संख्या को भी प्रभावित करते हैं, लेकिन इस पर आने वाले महीनों में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल पाएगी।


















