सोलापुर : जिले के गन्ना किसान एक बार फिर पैसे की आर्थिक तंगी में फंस गए हैं। जिले की 21 चीनी फैक्ट्रियों पर चालू पेराई सीजन का दिसंबर के आखिर तक का करीब 390 करोड़ रुपये का गन्ने का बिल बकाया है। कानून के मुताबिक 14 दिनों के अंदर भुगतान करना जरूरी है, लेकिन फैक्ट्रियों की तरफ से हो रही देरी किसानों के गुस्से का कारण बन रही है।
सीजन की शुरुआत में किसान संगठनों के बुलाए गए आंदोलन के बाद कई फैक्ट्रियों ने पहली क़िस्त प्रति टन 3000 रुपये तक करने का ऐलान किया था। लेकिन, असल में ज़्यादातर फैक्ट्रियों ने बेसिक रिकवरी के हिसाब से जारी FRP के हिसाब से ही बिल चुकाए हैं। यह बात सामने आई है कि प्रशासन को दिए गए आंकड़ों और किसानों के अकाउंट में असल में जमा हुई रकम में बड़ा अंतर है। जिले में बकाया बिलों के आंकड़ों के मुताबिक, सिद्धेश्वर फैक्ट्री (42.33 करोड़) सबसे ज़्यादा बकाया वाली फैक्ट्री निकली। इनके बाद लोकमंगल, भंडारकवठे (39.45 करोड़), यूटोपियन (39.19 करोड़), सिद्धनाथ (36.35 करोड़), लोकनेते (34.35 करोड़) और सीताराम महाराज (32.47 करोड़) फैक्ट्रियों का बकाया है।
एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन के संकेत शुगरकेन प्राइस कंट्रोल बोर्ड के मेंबर प्रो. सुहास पाटिल ने इस मामले में शुगर कमिश्नर से मुलाकात की है। इस पर ध्यान देते हुए शुगर कमिश्नर ने शुगर के जॉइंट डायरेक्टर के ज़रिए फैक्ट्रियों को किसानों को बकाया रकम 15 प्रतिशत ब्याज के साथ देने के लिखित ऑर्डर दिए हैं। ‘ॲग्रोवन’ के साथ बोलते हुए स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के जिला अध्यक्ष विजय रणदिवे ने कहा की, कुछ फैक्ट्रियां एडमिनिस्ट्रेशन को गन्ने के गलत भुगतान के आंकड़े जमा कर रही हैं और फैक्ट्रियों की मनमानी जारी है। चूंकि एडमिनिस्ट्रेशन अब अलर्ट नहीं है, इसलिए अब हम सीधे अधिकारियों के खिलाफ आंदोलन करेंगे और उन्हें कार्रवाई करने के लिए मजबूर करेंगे।

















