नई दिल्ली : वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने सरकार से मीठे ड्रिंक्स और शराब पर टैक्स काफी बढ़ाने को कहा है। उसे लगता है कि दुनिया के कई हिस्सों में मौजूदा टैक्स बहुत कम हैं।कई देशों में शुगर-स्वीटेंड बेवरेजेज (SSBs) पर एक्साइज टैक्स लगता है, लेकिन एक्सपर्ट्स इसकी असरदारता पर बहस करते हैं।‘चीनीमंडी’ से बात करते हुए इंडस्ट्री के अनुभवी जी. के. सूद ने कहा कि, टैक्स से चीनी की खपत कम करने में मदद नहीं मिली है।
उन्होंने कहा, विश्व स्तर पर, ऐसे कई उदाहरण हैं जहां ज़्यादा चीनी वाले प्रोडक्ट्स पर ज्यादा टैक्स लगने से फूड और बेवरेज कंपनियों ने चीनी की मात्रा को उस लेवल तक कम कर दिया है, जिस पर टैक्स न लगे, जबकि स्वाद को बनाए रखने के लिए सोर्बिटोल और अन्य हानिकारक केमिकल्स जैसे वैकल्पिक केमिकल्स का इस्तेमाल किया गया है। ये केमिकल्स शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं और इनमें कैंसर पैदा करने वाले तत्व होते हैं। इसके विपरीत, चीनी एक प्राकृतिक उत्पाद है।
सूद ने कहा कि, उपभोक्ताओं को अपनी रोज़ाना की चीनी की मात्रा के बारे में सोच-समझकर फैसला लेने का अंतिम विकल्प दिया जाना चाहिए।उन्होंने कहा, सही शिक्षा और जागरूकता ही कुंजी है। सीमित मात्रा में चीनी सेहत के लिए अच्छी होती है। यह एक जरूरी पोषक तत्व है जिसकी शरीर को ज़रूरत होती है। ज़ोर लाइफस्टाइल पर होना चाहिए। हमें एक सख्त एक्सरसाइज रूटीन शामिल करना होगा, न कि अपने खाने में कटौती करनी होगी।उनके अनुसार, लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां तो होंगी ही, भले ही कोई चीनी बिल्कुल भी न खाए।
















