महाराष्ट्र में चीनी मिलों पर 3968 करोड़ रुपये एफआरपी बकाया, किसान संगठनों द्वारा कार्रवाई की मांग तेज

कोल्हापुर: महाराष्ट्र में गन्ना पेराई सत्र अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और कई चीनी मिलों ने संचालन बंद कर दिया है।अनुमान है कि मार्च के अंत तक पूरा पेराई सत्र समाप्त हो जाएगा। फिलहाल कुछ ही मिलें चालू हैं, जो अगले 8 से 10 दिनों में बंद हो सकती हैं।हालांकि, पेराई सत्र खत्म होने को है, लेकिन 15 मार्च तक राज्य के 159 चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का करीब 3968 करोड़ रुपये का एफआरपी बकाया है।यह जानकारी चीनी आयुक्तालय की रिपोर्ट में सामने आई है।

आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 208 मिलों में से 159 मिलों ने अभी तक किसानों को पूरा एफआरपी भुगतान नहीं किया है, जबकि केवल 49 मिलों ने 100 प्रतिशत भुगतान किया है। 15 मार्च तक राज्य में 1015.87 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई की जा चुकी है। इस गन्ने के लिए कटाई और परिवहन खर्च सहित कुल देय एफआरपी 39,329 करोड़ रुपये है, जिसमें से 35,361 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। भुगतान की स्थिति पर नजर डालें तो 49 मिलों ने शत प्रतिशत एफआरपी दिया है, 86 मिलों ने 80 से 99.99 प्रतिशत, 48 मिलों ने 60 से 79.99 प्रतिशत, जबकि 25 मिलों ने 60 प्रतिशत से भी कम भुगतान किया है।

बकाया गन्ना भुगतान को लेकर राज्य की किसान संगठनों ने आक्रामक रुख अपना लिया है और जल्द भुगतान की मांग कर रहे हैं। वहीं, चीनी आयुक्त कार्यालय ने भी इस मुद्दे पर मिलों की सुनवाई शुरू कर दी है। अब एफआरपी बकाया रखने वाली मिलों पर क्या कार्रवाई की जाएगी, इस पर किसानों और किसान संगठनों की नजर बनी हुई है।

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