चीनी MSP और एथेनॉल खरीद मूल्य बढ़ाया जाए : केंद्रीय मंत्री अमित शाह से राजस्थान के राज्यपाल बागडे ने की मांग

नई दिल्ली : राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह से चीनी MSP और एथेनॉल खरीद मूल्य बढ़ाने की मांग की।मंत्री शाह को दिए गए आवेदन में बागडे ने लिखा है की, वेस्ट इण्डियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (विस्मा) के पदाधिकारियों ने 16 फरवरी 2026 को मुझसे मुलाकात की। इस बैठक के दौरान चीनी उ‌द्योग के जरिए राष्ट्र के औ‌द्योगिक विकास में योगदान और इससे किसानों के हित से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार विमर्श किया गया। वेस्ट इण्डियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.बी.ठोंबरे द्वारा बैठक में किए गए निर्णयों के आलोक में अपना प्रतिवेदन भारत सरकार को भेजे जाने के आग्रह के साथ मुझे प्रस्तुत किया है।

चीनी एमएसपी में 41 रुपये प्रति किलोग्राम, और एथेनॉल खरीद मूल्यों को बढ़ाने की मांग…

आवेदन में आगे लिखा है की, राष्ट्रीय चीनी उत्पादन का औसतन एक तिहाई यानी 100 से 115 लाख टन के बीच उत्पादन महाराष्ट्र में होता है। इसके अलावा एथेनॉल का उत्पादन भी बड़ी मात्रा में होता है।इससे बड़े स्तर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास जुड़ा हुआ है। चीनी उ‌द्योग राष्ट्रीय राजस्व प्राप्ति में जीएसटी और राज्य उत्पाद शुल्क के माध्यम से भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। परन्तु 2019 से चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) 31 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर है, और यह बहुत कम है। उत्पादन लागत के अनुसार चीनी के एमएसपी में 41 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की मांग की गई है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का मानना है कि, इससे इस ग्रामीण कृषि आधारित उ‌द्योग को काफी राहत मिलेगी। उचित मूल्य निर्धारण तंत्र के अंतर्गत चीनी उ‌द्योग की व्यवहार्यता को समर्थन देने और उचित प्रतिफल सुनिश्चित करने के लिए, 2025-26 सत्र के लिए एथेनॉल खरीद मूल्यों को बढ़ाने के अंतर्गत गन्ने का रस/सिरप-72 रुपये/लीटर, बी-हैवी मोलासेस – 69 रुपये/लीटर और सी-हैवी मोलासेस – 61 रुपये प्रति लिटर किए जाने का आग्रह किया गया है।

निज़ी चीनी मिलों को सहकारी चीनी मिलों के बराबर आवंटन करने की मांग…

इसी तरह यह बताया गया है कि निजी चीनी मिलों और डिस्टिरियों को निविदा में भरी गई आपूर्ति का केवल 35% ही आवंटित किया गया है। इससे एथेनॉल और B मोलासिस के भंडारण की क्षमता में भारी कमी हो रही है। इसे देखते हुए निज़ी चीनी मिलों को सहकारी चीनी मिलों के बराबर निविदा में आवंटित 100% मात्रा दिया जाना प्रस्तावित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, निवेश और सरकारी राजस्व में चीनी उ‌द्योग की भूमिका को देखते हुए, सहकारी और निजी चीनी मिलों दोनों के लिए एथेनॉल आवंटन में समान, निष्पक्ष और तर्कसंगत नीतियां बनाए जाने पर भी जोर दिया गया है। साथ ही निजी चीनी मिलों के लिए एनसीडीसी (नेशनल केयर फाउंडेशन) फंडिंग के द्वार खोलने पर भी विचार किया जाना प्रस्तावित किया गया है।

“आत्मनिर्भर” और “विकसित भारत” मिशन के लिए यथोचित कार्यवाही करने का आग्रह…

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने आगे लिखा है की, शुगर मिल्स सहकारिता आंदोलन से आरंभ से मेरा निकट का जुड़ाव रहा है।सहकारी विभाग के साथ-साथ निजी क्षेत्र का भी यदि विकास होता है, तभी दीर्घकालीन स्तर पर दोनों में लाभ की स्थितियां बनी रहेगी। इससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में भी उत्तरोतर वृद्धि होगी। “आत्मनिर्भर” और “विकसित भारत” मिशन के लिए राष्ट्रीय हित में समर्थन के आलोक में एसोसिएशन द्वारा प्रस्तुत मूल प्रस्ताव ही आपको प्रेषित कर आग्रह है कि, संलग्न अनुसार देश में चीनी मिलों से जुड़ी समस्याओं, उ‌द्योग से जुड़ी बाधाओं और इसके राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में सशक्त योगदान के आलोक में यथोचित कार्यवाही करवाने का श्रम करावें। इस संबंध में की गई कार्यवाही से मुझे भी अवगत कराएंगे तो आभारी रहूंगा।

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