नई दिल्ली : 1 अप्रैल 2026 से देश में बिकने वाले सभी पेट्रोल में अधिकतम 20% एथेनॉल (E20) मिलाना अनिवार्य होगा और उसे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के मानकों के अनुसार न्यूनतम 95 रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) पूरा करना होगा। यह नीति 2018 में शुरू हुई प्रक्रिया का परिणाम है और एथेनॉल उद्योग का कहना है कि, यह सिर्फ शुरुआत है। द इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित खबर के अनुसार, ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) के उपाध्यक्ष कुशल मित्तल ने बताया कि, भारत न केवल E20 के लिए तैयार है बल्कि इससे आगे जाने की क्षमता भी रखता है।
उन्होंने कहा, देश में हर साल लगभग 1,200 करोड़ लीटर एथेनॉल की जरूरत होती है, जबकि मौजूदा उत्पादन क्षमता करीब 2,000 करोड़ लीटर है। उद्योग अगले चरण के लिए पूरी तरह तैयार है।भारत का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ा है।सरकार ने 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 2030 से घटाकर 2025–26 कर दिया, क्योंकि जून 2022 में ही 10% मिश्रण का लक्ष्य समय से पांच महीने पहले हासिल कर लिया गया था।मित्तल ने कहा कि, 2018 में सरकार की स्पष्ट नीति के कारण उद्योग ने बड़े पैमाने पर निवेश किया। 2014–15 से अब तक एथेनॉल मिश्रण के जरिए भारत ने पेट्रोल आयात कम करके 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा बचाई है।सिर्फ E20 मिश्रण से ही पिछले वर्ष लगभग 5 अरब डॉलर की बचत हुई और किसानों की आय में करीब 4.6 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई।
मध्य पूर्व संकट के बीच रणनीतिक ऊर्जा विकल्प…
E20 के देशभर में लागू होने का समय भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर खतरे और कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने के बीच भारत का एथेनॉल भंडार अब केवल कृषि नीति नहीं बल्कि एक रणनीतिक ऊर्जा संपत्ति बन गया है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90% और प्राकृतिक गैस की करीब 50% आयात करता है। मौजूदा मध्य पूर्व संघर्ष ने इस निर्भरता को और उजागर कर दिया है।मित्तल के अनुसार, एथेनॉल एक अच्छा ईंधन है, इसमें ऊर्जा अधिक और उत्सर्जन कम होता है। भारत ऐसी स्थिति में है जहां कच्चे माल और उत्पादन क्षमता दोनों प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि, एथेनॉल को खाना पकाने के ईंधन के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसा कई देशों में किया जा रहा है। उनके अनुसार घरों में एथेनॉल जलाने से गैस की तुलना में कम उत्सर्जन होता है और भारत में इसके वितरण का बुनियादी ढांचा भी काफी हद तक मौजूद है। अब जब E20 पूरे देश में लागू हो गया है, तो AIDA सरकार से दूसरे चरण (Phase-2) की नीति लाने की मांग कर रहा है ताकि अतिरिक्त एथेनॉल क्षमता का उपयोग नए क्षेत्रों में किया जा सके।E20 ईंधन से E10 के मुकाबले लगभग 30% कम कार्बन उत्सर्जन होता है। एथेनॉल का ऑक्टेन स्तर अधिक होने के कारण आधुनिक इंजनों में प्रदर्शन भी बेहतर होता है।
नीति आयोग के एक अध्ययन के अनुसार गन्ने से बने एथेनॉल से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन लगभग 65% और मक्का से बने एथेनॉल से लगभग 50% तक कम होता है, जब इसकी तुलना शुद्ध पेट्रोल से की जाए।हालांकि, 2023 से पहले बने कुछ पुराने वाहनों में E20 इस्तेमाल करने पर ईंधन दक्षता में 3 से 7 प्रतिशत तक मामूली कमी आ सकती है।एथेनॉल उद्योग का संदेश सरकार के लिए साफ है—कच्चा माल मौजूद है, उत्पादन क्षमता भी तैयार है और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए यह सही समय है। अब उद्योग को सिर्फ दूसरे चरण की नीति का इंतजार है।


















