नई दिल्ली : वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते फरवरी 2026 में भारत का वस्तु निर्यात (Goods Exports) साल-दर-साल आधार पर 0.81 प्रतिशत घटकर 36.61 अरब डॉलर रह गया। वाणिज्य विभाग के अनुसार पश्चिम एशिया संकट और लॉजिस्टिक बाधाओं के कारण मार्च में निर्यात के सामने और बड़ी चुनौती आने की संभावना है। फरवरी 2026 में आयात 24.11 प्रतिशत बढ़कर 63.71 अरब डॉलर हो गया, जबकि व्यापार घाटा बढ़कर 27.1 अरब डॉलर पहुंच गया।यह फरवरी 2025 के 14 अरब डॉलर के मुकाबले लगभग दोगुना है।हालांकि, यह जनवरी 2026 के 34.68 अरब डॉलर के व्यापार घाटे से कम है।
इसके बावजूद सरकार को उम्मीद है कि, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में वस्तुओं का निर्यात सकारात्मक क्षेत्र में बना रहेगा। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया संकट से निपटने में निर्यातकों की मदद करने और दुनिया के अन्य बाजारों में निर्यात बढ़ाने के प्रयास कर रही है। अग्रवाल ने कहा, व्यापार के मोर्चे पर हमें एक के बाद एक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण मार्च और अधिक चुनौतीपूर्ण होगा। उस क्षेत्र से जितना निर्यात कम होगा, हम उसे अन्य बाजारों में अधिक निर्यात करके पूरा करने की कोशिश करेंगे। हमारा लक्ष्य इस वित्त वर्ष के अंत तक वस्तु निर्यात को पिछले वर्ष की तुलना में सकारात्मक बनाए रखना है।” उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में व्यापार बाधाओं से जूझ रहे निर्यातकों की मदद के लिए सरकार एक सप्ताह के भीतर सहायता पैकेज की घोषणा करेगी।
अप्रैल–फरवरी के आंकड़े…
अप्रैल से फरवरी 2025-26 के दौरान भारत का वस्तु निर्यात 402.93 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 395.66 अरब डॉलर की तुलना में लगभग 1.84 प्रतिशत अधिक है।हालांकि ईरान में जारी युद्ध के कारण मार्च 2026 में निर्यात प्रदर्शन में गिरावट आ सकती है, जिससे यह आंकड़ा प्रभावित हो सकता है। इस दौरान अप्रैल–फरवरी 2025-26 में आयात भी 8.53 प्रतिशत बढ़कर 713.53 अरब डॉलर हो गया।वाणिज्य सचिव ने बताया कि, फरवरी में निर्यात में गिरावट मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात मूल्य में कमी के कारण हुई, जबकि व्यापार घाटा बढ़ने का प्रमुख कारण सोना और चांदी के आयात में वृद्धि रहा।















