ISMA का सरकार को LPG आयात कम करने के लिए एथेनॉल उपयोग का सुझाव, PMO को दिया ज्ञापन

नई दिल्ली : भारत के चीनी उद्योग ने घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल के उपयोग को बढ़ाकर आयातित एलपीजी (LPG) पर निर्भरता कम करने और सरकार पर सब्सिडी का बोझ घटाने का प्रस्ताव रखा है। बिज़नस वर्ल्ड में प्रकाशित खबर के अनुसार, यह सुझाव इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को दिए गए एक ज्ञापन में दिया है। ISMA ने कहा कि, एलपीजी आयात पर बढ़ती निर्भरता भारत को वैश्विक आपूर्ति जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाती है, खासकर मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच। ISMA ने यह भी बताया कि, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं के बावजूद, भारत की लगभग 60% एलपीजी जरूरतें आयात से पूरी होती हैं।

ISMA के अनुसार, भारत हर साल 34 मिलियन टन से अधिक एलपीजी की खपत करता है, जिसका बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से होकर आता है, जिससे आपूर्ति बाहरी व्यवधानों के प्रति असुरक्षित रहती है। ज्ञापन में बताया गया कि, भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता 2,000 करोड़ लीटर से अधिक हो चुकी है, जिसे सरकारी बायोफ्यूल नीतियों और एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का समर्थन मिला है। ISMA का कहना है कि, एथेनॉल स्वच्छ दहन, कम उत्सर्जन और “पे-एज-यू-गो” जैसे लचीले वितरण मॉडल के कारण खाना पकाने के लिए एलपीजी का एक व्यवहारिक विकल्प बन सकता है।

प्रस्ताव के अनुसार, यदि घरेलू एलपीजी खपत का 20% हिस्सा एथेनॉल से बदल दिया जाए, तो हर साल लगभग 6 मिलियन टन एलपीजी की बचत हो सकती है और तेल विपणन कंपनियों को दी जाने वाली सब्सिडी व अन्य भुगतान में 8,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत संभव है। ISMA ने इस बदलाव के लिए एक सुव्यवस्थित नीति ढांचा बनाने की सिफारिश की है, जिसमें एथेनॉल को स्वच्छ ईंधन के रूप में आधिकारिक मान्यता देना, मौजूदा ईंधन वितरण नेटवर्क से जोड़ना, नए वितरण मॉडल को बढ़ावा देना और लक्षित पायलट प्रोजेक्ट शामिल हैं।

ISMA ने यह भी सुझाव दिया कि इन पहलों को Pradhan Mantri Ujjwala Yojana जैसी मौजूदा योजनाओं के साथ जोड़ा जाए, ताकि व्यापक स्तर पर अपनाने और पहुंच सुनिश्चित की जा सके। ज्ञापन में जोर दिया गया कि, यदि इन उपायों को लागू किया गया, तो इससे भारत की एलपीजी आयात पर निर्भरता कम होगी, सब्सिडी पर सरकारी खर्च घटेगा और बायोफ्यूल के घरेलू बाजार का विस्तार होगा, जिससे घरों और छोटे व्यवसायों के लिए अधिक टिकाऊ और मजबूत ईंधन प्रणाली विकसित हो सकेगी।

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