बेंगलुरु (कर्नाटक): उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल के केंद्र के प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि, ऐसे उपायों से किसानों को असली फायदा नहीं होगा। उन्होंने चीनी के MSP न बढ़ाने पर भी केंद्र पर सवाल उठाए। उनकी यह टिप्पणी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के बाद आई, जिसमें उन्होंने भारत-विस्तार लॉन्च करने की घोषणा की थी। यह एक बहुभाषी AI-आधारित प्लेटफॉर्म होगा जो एग्रीस्टैक पोर्टल और कृषि पद्धतियों पर ICAR पैकेज को AI सिस्टम के साथ इंटीग्रेट करेगा। इस पहल का मकसद खेती की उत्पादकता बढ़ाना, किसानों को बेहतर फैसले लेने में मदद करना और कस्टमाइज्ड सलाह सेवाओं के जरिए जोखिम कम करना है।
शिवकुमार ने कहा, वे MGNREGA में भी मजदूरी तय करने के लिए AI का इस्तेमाल करने की बात कर रहे हैं। लेकिन उन्होंने खेती के मौसम में मजदूरी नहीं दी। AI से खेती को कोई फायदा नहीं होता। किसानों को असली मदद की जरूरत है।शिवकुमार ने इस बात पर जोर दिया कि, किसानों की फसलों को रेशम उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और चीनी के MSP न बढ़ाने पर केंद्र पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा, चीनी की कीमत क्यों नहीं बढ़ाई गई है? इसकी वजह से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। अगर चीनी की कीमत नहीं बढ़ाई गई, तो सहकारी चीनी उद्योग बंद होने की कगार पर आ जाएगा। हमारे क्षेत्र के पांच जिलों में गन्ने की खेती होती है।केंद्र ने किसानों को क्या मदद दी है? पिछले कुछ सालों से चीनी की कीमत नहीं बढ़ाई गई है।
केंद्र सरकार ने गन्ने के किसानों के हितों की रक्षा के लिए 2018 में 29 रुपये प्रति किलो पर चीनी का MSP शुरू किया था। इंडस्ट्री को अधिक उत्पादन की समस्या का सामना करना पड़ रहा था, जिसमें लगातार कई सालों तक चीनी का सरप्लस उत्पादन और कम बिक्री हो रही थी। इससे चीनी की कीमतें कम हो गईं, और चीनी मिलें लाभकारी कीमतें कमाने में असमर्थ थीं, जिससे गन्ने का बकाया खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था। सरकार ने MSP इसलिए शुरू किया ताकि एक निचली सीमा तय की जा सके जिसके नीचे चीनी की कीमतें न जाएं। फिलहाल, चीनी का MSP 31 रुपये प्रति किलो पर स्थिर है।

















